इलाहाबाद (ब्यूरो)। महीयसी महादेवी वर्मा की 29वीं पुण्यतिथि पर रविवार को साहित्यकार संसद भवन में जुटे मनीषियों ने उन्हें याद किया। ‘भारतीय लोकतांत्रिक समाज एवं समसामयिक हिंदी साहित्य’ विषयक गोष्ठी में बतौर अध्यक्ष राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एमपी दूबे ने कहा, छायावाद में दो विचारधाराएं हैं। वैयक्तिकता और सामाजिकता। महादेवी वैयक्तिक विचारधारा की थीं, उनकी रचनाओं में आधुनिकता और बुद्धिज्म का दर्शन है। डॉ.त्रिभुवन राय ने कहा, समसामयिक कहानियों में ऐसे तमाम उल्लेख मिलते हैं, जो सत्ता, वैभव और गौरव के दुरुपयोग को दिखाते हैं।
प्रधान सचिव प्रद्युमभननाथ तिवारी ‘करुणेश’ ने कहा, आज महादेवी के विचारों पर केंद्रित भारतीय लोकतांत्रिक समाज पर आधारित समसामयिक साहित्य की रचना की जरूरत है। इसी क्रम में डॉ.पृथ्वी नाथ पांडेय,चंद्रशेखर प्राण ने भी विचार व्यक्त किये। दूसरे सत्र में पं.राम लखन शुक्ल की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में कृष्ण देवी मिश्र, बलराम पांडेय, विवेक सत्यांशु, लालजी देहाती, वीरेंद्र तिवारी, शंकर प्रियदर्शी, जय प्रकाश शर्मा, अशोक कुमार स्नेही ने काव्य पाठ किया। वहीं अशोक नगर स्थित महादेवी आवास पर भी महादेवी जी के पुत्रवत सहायक रामजी पांडेय की पत्नी रानी पांडेय की उपस्थिति में जुटे परिजनों ने उन्हें याद किया।
हिंदी साहित्य की धरोहर हैं महादेवी
इलाहाबाद (ब्यूरो)। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा युवा प्रकोष्ठ की ओर से महादेवी वर्मा को याद करते हुए निशीथ वर्मा ने कहा, महादेवी की छायावादी कविताओं में समाज की एकरूपता झलकती है। मुख्य अतिथि केपी ट्रस्ट के पूर्व उपाध्यक्ष वित्त गोपी कृष्ण श्रीवास्तव ने महादेवी के स्त्री सरोकारों को रेखांकित किया। महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री सुमित श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, मुकेश, डॉ.राजेश, मनोज आदि ने भी उन्हें याद किया।
वहीं राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से जिलाध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा के नेतृत्व में सिविल लाइंस स्थित महादेवी प्रतिमा के पास दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रेनू वर्मा ने कहा, महादेवी हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। कार्यक्रम में अतुल तिवारी, अजित सिंह, राकेश कुमार, अक्षत आदि मौजूद रहे।