एनजीटी के आदेश को होटल संचालकों ने दी है चुनौती
होटल संचालकों (याचियों) ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा कि उन्हें सुने बिना भारी मुआवजे का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। याचियों ने उसे रद्द करने की मांग की थी। मामले में याचिका की विचारणीयता पर एक प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई थी, जो ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान करती है। याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत न्यायिक समीक्षा की शक्ति बुनियादी ढांचे का हिस्सा है। एनजीटी की धारा 22 के अस्तित्व के बावजूद न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्रभावित नहीं है। हाईकोर्ट 226 के तहत कानून के अनुसार और मामले के तथ्यों के आधार पर अपने विवेक का प्रयोग कर सकता है।