शिवगढ़। रानीगंज के जरियारी गांव में इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे बिहार से आए लोगों के सामने जब राशन व आर्थिक संकट गहराया तो वे पैदल ही अपने गांव चल पड़े। शुक्रवार को सिर पर बैग व झोला लेकर वह उड़ैयाडीह बाजार पहुंचे। चेहरे पर निराशा थी और कोरोना के बढ़ते संक्रमण से खौफ भी। पूछने पर कहा...जेब खाली हो चुकी है, राशन भी नहीं है, आखिर क्या करें।
रानीगंज तहसील क्षेत्र के जरियारी गांव में आईटीआई कालेज का निर्माण कार्य चल रहा है। तीन महीने पहले मजदूरी करने के लिए बिहार राज्य से ठेकेदार लालबाबू के साथ अभय चौधरी, धनंजय, सुधीर कुमार और रवींद्र आए थे। 25 मार्च को लॉकडाउन होने से कार्य ठप हो गया। इस दौरान बगैर बताए ही ठेकेदार लालबाबू सभी को छोड़कर भाग निकला। लॉकडाउन के दौरान 30 दिन के भीतर अभय, धनंजय, सुधीर रवींद्र के पास जो भी रुपये व राशन का स्टाक था, सब खत्म हो गया। ऐसे में उनके सामने राशन के साथ ही आर्थिक तंगी भी आ गई।
शुक्रवार को सभी बैग व झोला लेकर अपने गांव के लिए निकल पड़े। दोपहर में वह उडै़याडीह बाजार से गुजर रहे थे। लोगों के पूछने पर आपबीती सुनाई। बताया कि राशन व रुपये खत्म होने के बाद अब उनके पास यही रास्ता बचा है। वह पट्टी होते हुए बिहार जाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने 10 दिन में बिहार पहुंचने का संकल्प लिया है।