बहादुरपुर विकास खंड का एक गांव ऐसा भी है कि जहां की महिलाओं ने अपने अथक परिश्रम से न केवल अपनी जिंदगी में उजाला ले आईं, साथ परिवार के पुरुषों को भी बेरोजगारी से उबारकर रोजगार थमा दिया। गांव की ये महिलाएं पिछले चार साल से यहां की खास पहचान बनी हुई हैं। ये महिलाएं आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए भी रोजगार को लेकर प्रेरणास्त्रोत बनी हुई हैं।
झूंसी से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर हनुमानगंज के धनैचा-मलखानपुर गांव की आबादी लगभग आठ हजार है। पुरुषों की संख्या 60 तो महिलाओं की 40 प्रतिशत है। इसके बावजूद इस गांव की महिलाएं अपने परिवार के पुरुषों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
गांव की ग्रेजुएट पास महिला ममता सिंह और निर्मला मौर्य ने तकरीबन चार साल पहले बहादुरपुर ब्लॉक के अफसरों की मदद से गांव में स्वयं सहायता समूह की शुरूआत की। शुरुआत में बमुश्किल गांव की चार-पांच महिलाएं ही समूह से जुड़ीं। इसके बावजूद भी दोनों महिलाओं ने हार नहीं मानी और लगातार समूह से महिलाओं को जोड़ने के लिए मेहनत करती रहीं।
परिणाम यह रहा कि चार साल बाद एक नहीं बल्कि 26 स्वयं सहायता समूह का गठन धनैचा-मलखानपुर गांव में किया जा चुका है। प्रत्येक समूह में 12 से 14 महिलाएं शामिल हैं। प्रत्येक समूह की एक ग्रुप लीडर भी होती हैं। इस वक्त 26 स्वयं सहायता समूह में गांव की 300 से ज्यादा महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं।
समूह की मुख्य संचालिका ममता सिंह बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं को समूह से जोड़ने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी, लेकिन आज के समय में वे स्वयं आकर जुड़ रही हैं। इनके समूह को गति देने में पूर्व प्रधान पति अजीत मौर्य ने काफी मदद की। आसपास के गांवों की महिलाओं को रोजगार देने की सोच से अब ये उन गांवों में जाकर महिलाओं को इसके फायदे बता रही हैं।
समूह से जुड़ी महिलाओं ने ऋण लेकर शुरू किए कई तरह के रोजगार
धनैचा-मलखानपुर गांव में बनाए गए स्वयं सहायता समूह के जरिये कई महिलाओं ने बैंकों से ऋण लेकर न केवल रोजगार कर रही हैं, बल्कि अच्छी कमाई कर पूरे परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं। समूह की रामरती देवी ने बैंक से ऋण लेकर पति दीना मौर्य को ई-रिक्शा दिलाया।
इसी प्रकार, मंजू मौर्य और रीना मौर्य ने भी अपने पति को ई-रिक्शा दिलवाया। ये सभी दिनभर में ई-रिक्शा चलाकर 1500 से 2000 रुपये तक कमाई कर रहे हैं। इसी प्रकार, अनीता गुप्ता ने स्वयं सहायता समूह के जरिए बैंक से ऋण लेकर चिप्स और पापड़ का कारोबार शुरू किया। अनीता चिप्स और पापड़ बनाकर पति के जरिए बाजार में सप्लाई करती हैं।
गीता भारतीया ने गांव में ही अपना ब्यूटी पार्लर खोल रखा है। सविता मौर्य गांव में ही सिलाई कढ़ाई केंद्र चलाती हैं। राधिका देवी चाट और आईस्क्रीम का ठेला लगाकर कमाई कर रही हैं। कुसुम देवी, सुलोचना व पूजा ने भैंस और अंजू देवी व शिवानी ने गाय खरीदकर दुग्ध पालन का कारोबार शुरू किया है। इसी प्रकार, मनीषा भारतीय और रीता भारतीया बकरी पालन का कारोबार कर रही हैं। रेनू सिंह चौहान किराने की दुकान चलाती हैं। आरती मौर्य सब्जी की खेती करा रही हैं। मीना मौर्य ने गांव में ही सहज सेवा केंद्र खोल रखा है।