राष्ट्रीय आंदोलनों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही है, लेकिन आज भी उन्हें बराबरी का अधिकार हासिल नहीं हो सका है। कवि शुभा ने महादेवी स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के तहत आयोजित गोष्ठी में यह विचार व्यक्त किए।
सिविल लाइंस स्थित बाल भारती स्कूल में महिला आंदोलन सत्ता और समाज विषय पर हुई गोष्ठी में उन्होंने कहा कि आजादी से पहले बाल विवाह, विधवा विवाह, सती प्रथा आदि कई सुधार आंदोलन चले। लेकिन आजादी के बाद महिलाओं के मुद्दे गौण हो गए। क्योंकि वे राजनीति के केंद्र में नहीं रहीं।
अध्यक्षीय वक्तव्य में पद्मा सिंह ने एक कविता की पंक्ति से बात शुरू की। कहा कि तेरा हंसना एक युद्ध, पूरी सदी के विरुद्ध। उन्होंने स्त्री आंदोलनों को केंद्रित करते हुए कहा कि अगर पहले से राजनीति में महिलाओं ने अपना हिस्सा तय किया होता तो आज स्थिति कुछ और होती।
इससे पहले कार्यक्रम में सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान एक नाट्य प्रस्तुति की गई, जिसमें निकिता, शिवांगी, साक्षी, मांडवी, श्वेता ने अभिनय किया। गोष्ठी में विवि के छात्रों, बुद्धिजीवियों और साहित्याकारों ने हिस्सा लिया। संचालन समता राय ने किया।