अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को विभिन्न संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं महिलाओं को सम्मानित किया गया तो कहीं महिलाओं अधिकारों और अपराध के मुद्दों को उठाया गया।
लोक उन्नति समिति की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिए महिलाओं को सम्मानित किया गया। जिसमें डॉ. संजू शुक्ला, नाजिया नफीस, अर्चना, स्मृति सिंह, सुरभि गुप्ता, मीनाक्षी कुशवाहा, अपर्णा पांडेय, शानू राठौर को ‘सुपर पावर वुमेन’ के खिताब से नवाजा गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी कविता यादव ने कहा कि महिलाओं को अपने दम पर निणर्य लेना, गलत के खिलाफ आवाज उठाना और अपने हक को हासिल करना सीखना होगा।
आरजे निधि ने कहा कि समाज को बेहतर बनाना है तो बेटों को बचपन से ही महिलाओं का सम्मान करना सिखाना होगा। महिलाओं को सेकेंड जेंडर का दर्जा नहीं बल्कि समानता चाहिए। महिला दिवस तभी सफल होगा, जब बेटियों को घर से बाहर निकलने में डर नहीं लगेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष अभिषेक चौहान और संचालन ऐंकर दीक्षा ने किया। इस दौरान एके ओझा, धर्मेंद्र नाथ मिश्रा, श्यामाचरण त्रिपाठी, पंकज सिंह, संजीव सिंह आदि मौजूद रहे। डॉ. कनिका डेंटल स्पा में भी विभिन्न क्षेत्रों उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। जिसमें गुंजना अरुण, प्रिया, नंदिनी, डॉ. अनामिका, चंदिका, रिदिमा, निहारिका शामिल रहीं। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई।
अपनी क्रांतिकारी विरासत से अपरिचित है महिलाएं
दिशा छात्र संगठन और स्त्री मुक्ति लीग की ओर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की विरासत और आज का समय विषय पर बातचीत की गई। स्त्री मुक्ति लीग की नीशू ने महिला दिवस के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि महिलाएं आज अपनी क्रांतिकारी विरासत से परिचित नहीं है। महिलाओं के विरुद्ध अपराध निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। दिशा छात्र संगठन की अंजलि ने कहा कि आज के समय में महिलाओं की लड़ाई को सरकारी कार्यक्रमों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इस संघर्ष को अन्य उत्पीड़ित वर्गों की लड़ाई से जोड़ना होगा। इस दौरान पोस्टर-पुस्तक प्रदर्शनी के साथ ही स्त्री केंद्र्रित कविताओं का भी पाठ किया गया।