स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में बृहस्पतिवार को प्रसव के दौरान निशा (45) की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने डाॅक्टरों पर गलत इलाज करने का आरोप लगाया और शव ले जाने से मना कर दिया। वहीं, चिकित्सकों का कहना था महिला को डफरिन अस्पताल से रेफर किया गया था। उसकी हालत पहले से ही नाजुक थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया।
डफरिन अस्पताल से रेफर करके बृहस्पतिवार को गर्भवती को प्रसव के लिए एसआरएन लाया गया था। प्रसव के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर गलत ऑपरेशन का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया और शव ले जाने से इन्कार कर दिया।
परिजन आलोक द्विवेदी ने बताया कि भाभी निशा का एसआरएन अस्पताल इलाज में चल रहा था। सुबह करीब छह बजे उनका ऑपरेशन हुआ। उन्होंने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दस बजे के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और बताया गया कि दो यूनिट रक्त की जरूरत है। व्यवस्था करने के बाद भी उनकी माैत हो गई। आलोक ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही से भाभी की माैत हुई है। अस्पताल में कोई सीनियर डाॅक्टर नहीं है, सिर्फ जूनियर के सहारे अस्पताल चल रहा है।
महिला को जब अस्पताल लाया गया, तो इसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। परिजनों को समझाकर शांत कराया गया। - डॉ. अजय सक्सेना, प्रमुख अधीक्षक, एसआरएन
महिला के पहले से दो बच्चे हैं। इसके अलावा जब वह गर्भवती हुई तो नियमित जांच नहीं कराई गई। महिला की मौत दिल की धड़कन तेज होने से हुई है। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग, एसआरएन, प्रयागराज