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प्रयागराज : सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने मेहनत और जुनून के दम पर वीरान मैदान को बना दिया उद्यान

Mon, 05 Jun 2023 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

2010 से शुरू किए इस पहल की शुरुआत में न्यायाधीश रहते हुए भी उनको काफी विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार प्रयासों के बूते लगभग छह सौ पेड़ों का शिवाजी पार्क शहर के बीच में बना दिया। जहां अब सुबह शाम सैकड़ों की संख्या में लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं।
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विश्व पर्यावरण दिवस - फोटो : istock
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विस्तार
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विकास की आंधी में सबसे ज्यादा किसी का नुकसान हुआ है तो वह प्रकृति है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों के लिए मिसाल बने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसके सिंह ने अपनी मेहनत और जूनून के बदौलत मम्फोर्डगंज में वीरान पड़े मैदान को उद्यान में तब्दील कर दिया। हालांकि 2010 से शुरू किए इस पहल की शुरुआत में न्यायाधीश रहते हुए भी उनको काफी विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार प्रयासों के बूते लगभग छह सौ पेड़ों का शिवाजी पार्क शहर के बीच में बना दिया। जहां अब सुबह शाम सैकड़ों की संख्या में लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं।

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पार्क ऐसा है कि जहां योग, जिम, दौड़ के लिए अलग व्यवस्था है। तीन हजार वर्ग फिट में फैले इस पार्क में फूलों के लिए अलग से इंतजाम है। शिवाजी पार्क लगातार पुष्प प्रदर्शनी में जीतते हुए आया है। एसके सिंह बताते हैं कि शुरुआत में पेड़ों को बचाने के लिए जाली लगाकर जानवरों से बचाया। कुछ शरारती लोग तो रात में पेड़ उखाड़ देते थे, जिसकी निगरानी हम खुद करते थे। शहर के कमिश्नर रहे बादल चटर्जी के साथ ही शिवाजी पार्क में कई न्यायाधीशों ने पौधे लगाए हैं। उद्यान की निगरानी के लिए एक सरकारी माली है जबकि एक निजी माली एसके सिंह ने रखा है।

एसके सिंह कहते हैं कि बुके की जगह पर पौधा देने की परंपरा शुरू करनी चाहिए, जब तक कोई चार पौधे न लगाए उनकी वाहन का पंजीकरण नहीं करना चाहिए। प्रकृति की उपासक बनने से भगवान भी खुश रहेंगे और पेड़ भी बचे रहेंगे। पर्यावरण की क्षति का सबसे ज्यादा असर जलवायु परिवर्तन पर हुआ है। जिसका परिणाम दुनिया देख रही है। पॉलिथीन बंद होन के बावजूद प्रदेश में धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है।

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पहले मैदान था जुआरियों का अड्डा, देसी बमों का होता था परीक्षण
एसके सिंह बताते हैं कि यह मैदान जुआरियों का अड्डा हुआ करता था, यहीं पर देसी बम की टेस्टिंग होती थी। लेकिन जब से हमनेे पहल शुरू की, धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में खुद को स्वस्थ रखना बड़ी चुनौती हो गई है ,क्योंकि हम शुद्ध हवा पानी के अभाव में जी रहे हैं। हर साल लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं लेकिन बचे कितने हैं यह सोचने की बात है। इसलिए भले ही पेड़ न लगाएं, लेकिन पेड़ बचाने की जिम्मेदारी सभी की होनी चाहिए तब जाकर स्वस्थ होने की बात कर सकते हैं।

जहां पहले जुआरियों का अड्डा हुआ करता था आज शिवाजी पार्क है। इसका पूरा श्रेय जज साहब को जाता है। सुबह शाम पार्क में आने वालों का तांता लगा रहता है। - तेजप्रताप सिंह, मम्फोर्डगंज

हर मोहल्ले में एक ऐसा ही पार्क होना चाहिए। जिसमें सुबह शाम लोग जाकर सुकून के पल बिताने के साथ ही स्वस्थ रहने के लिए कसरत, योग कर सकें। - कृष्णकुमार शर्मा, मम्फोर्डगंज
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