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टहलने से टल जाएगा कैंसर

Sun, 16 Jul 2017 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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ओहियो, अमेरिका में विश्व के दूसरे नंबर के अस्पताल क्लेवलैंड क्लीनिक में कैंसर बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. यांग ली की सलाह है कि कैंसर से बचना है तो सुबह या शाम टहलें और व्यायाम जरूर करें। कैंसर सेल की प्रभावी रोकथाम पर रिसर्च कर रहे डॉ. यांग के मुताबिक विकसित देशों में एक तिहाई मौतें कैंसर से होती हैं। पेस्टिसाइड, इंसेक्टिसाइड, खानपान, बदलते पर्यावरण से कैंसर के मामले तो बढ़े ही हैं, इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता और डायग्नोस के कारण भी कैंसर के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। पहले भी कैंसर से तमाम मौतें होती थीं लेकिन डायग्नोस न होने पाने के कारण मौतों की वजह सामने नहीं आ पाती थी।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शोधार्थियों के बीच व्याख्यान देने पहुंचे कैंसर वैज्ञानिक डॉ. यांग ने बातचीत में कहा कि शोध में अब तक यह सामने आया है कि टहलने और व्यायाम करने से कैंसर से लड़ने वाली सेल मजबूत होती हैं। शरीर में ‘टी’ और ‘बी’ सेल होती हैं। ‘टी’ सेल कैंसरेस हो चुकी कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें मारती हैं। कैंसर में तब्दील होने वाली कोशिकाएं बहरूपिए की तरह होती हैं। ऐसे में अक्सर ‘टी’ सेल उन्हें पहचाने में धोखा खा जाती हैं। शोध में वह ‘टी’सेल को बाहर निकालकर उसमें बदलाव करते हैं ताकि वह कैंसर की कोशिकाओं को चिह्नित कर सकें। ऐसे में बदलाव के बाद ‘टी’ सेल को उसी शरीर में वापस डाल दिया जाता है, जिससे वह निकाली गई थी। डॉ. यांग के मुताबिक एक शोध में लिक्विड बायोप्सी यानी खून की जांच से कैंसर का पता लगा पाने में सफलता मिली है लेकिन इस पर अभी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अमेरिका की मुहर नहीं लगी है।

कैंसर से बचाव के लिए बरतें सावधानी
- स्मोकिंग या तंबाकू के अन्य उत्पादों से बचें
- एल्कोहल का सेवन न करें, क्योंकि इससे लिवर कैंसर की आशंका बढ़ जाती है
- रेड मीट और रोस्टेड मीट का सेवन भी कम से कम करें। बिल्कुल न करें तो अच्छा है
- शुद्ध वातावरण में टहलें और व्यायाम के लिए कुछ वक्त जरूर निकालें। शुद्ध वातावरण नहीं है तो भी व्यायाम जरूर करें

डॉ. यांग ली के मुताबिक कैंसर अलग-अलग प्रकार का होता है। इनमें पैनक्रियाटिक कैंसर का इलाज काफी मुश्किल है। एप्पल कंपनी के संस्थापक को भी यही कैंसर हुआ था और बाद में उनकी मौत हो गई। हालांकि ऑपरेशन से इसका इलाज संभव है। थर्ड या फोर्थ स्टेज पर ब्लड कैंसर का 40 फीसदी इलाज संभव है लेकिन जेनरिक कैंसर का कोई इलाज नहीं। यह जेनेटिक होता है और इसकी सेल शरीर में पहले से होती है। इसे जीन पी-53 कहते हैं। अगर यह शरीर में हो तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर कैंसर जरूर होगा।
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डॉ. यांग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) की छह मीलियन अमेरिकी डॉलर की तीन ग्रांट पर काम कर रहे हैं। 45 वर्ष की उम्र में डॉ. यांग को एनआईएच से तकरीबन 10 ग्रांट मिल चुकी है, जो किस भी वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि है। डॉ. यांग ने कैटलिक आरएनए पर वैज्ञानिक सिडनी अल्टमैन के साथ भी काम किया है, जिन्हें केमेस्ट्री के लिए नोबल पुरस्कार मिल चुका है। डॉ. यांग 20 साल पहले चीन छोड़कर अमेरिका गए थे और अब वहीं की नागरिकता प्राप्त कर ली। उनका लक्ष्य है कि हर प्रकार के कैंसर का शतप्रतिशत इलाज ढूंढा जा सके।
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