आसानी से कहीं भी ले जाया सकेगा ट्राली बैग
अभी ट्रेन मैनेजर को सफर के दौरान बक्सा रखना पड़ता है। सामान आदि के साथ इसका वजन 12 से 15 किलो रहता है। इस वजह से ग्रुप डी स्टाफ ही बक्सा ट्रेन मैनेजर तक पहुंचाते हैं। उसे चढ़ाने एवं उतारने का भी काम उन्हीं का है, लेकिन ट्राली बैग आने के बाद ट्रेन मैनेजर को उन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा आइटम को कम किए बिना 6.2 किलोग्राम वजन वाले हल्के एवं आसानी से चलायमान ट्रॉली बैग का प्रयोग होगा। इसमें एक एचएस लैंप, 2 लाल और 1 हरा झंडा, एक टेल लैंप, एलवी बोर्ड, मैन्युअल, जीएंडएसआर.,वर्किंग टाइम टेबल, वॉकी-टॉकी, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, 10 डेटोनेटर, ताला-चाभी, फ्लेशर टॉर्च , सीटी, री-सेटिंग चाभी, एसएलआर के गार्ड के डिब्बे को खोलने और बंद करने के लिए सार्वभौमिक कुंजी, झंडे के लिए दो प्लास्टिक की छड़ें, एक प्लास्टिक फोल्डर, गार्ड सर्टिफिकेट और शिकायत पुस्तिका रहेगी
यूनियन कर रही है ट्रॉली बैग का विरोध
ट्राली बैग का रेलवे यूनियन विरोध कर रही है। इस बारे में नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव का कहना है कि रनिंग स्टाफ को दिए जाने वाले सामान में तकरीबन 10 पटाखे, 80 गाम विस्फोटक होता है। किसी अनहोनी पर उसका उपयोग होता है। उसे ट्राली बैग में रखकर ड्यूटी करना एवं उसके बाद घर ले जाना न कर्मचारी के लिए सही है और न ही उसके परिवार के लिए।
ट्रेन मैनेजर एक अपना बैग भी ड्यूटी पर लेकर आते हैं। उसमें राशन, एक जोड़ी कपड़ा, अगर जाड़ा है तो गर्म कोट, बारिश में रेनकोट आदि रहता है, जो ट्राली बैग में रखकर चलना संभव नहीं है। मालगाड़ी में गार्ड सीट न होने पर उसी पर बैठकर उन्हें काम करना पड़ता है। यात्री ट्रेन में टेबल न होने के कारण ट्रेन मैनेजर अपने बॉक्स का ही इस्तेमाल करते हैं। भारी होने की वजह से बक्से चोरी नहीं होता, जबकि ट्राली बैग हल्का होने की वजह से चोरी भी हो सकता है।