प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को एलटी ग्रेड अध्यापकों द्वारा पढ़ाए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका दाखिल कर कहा गया है कि एनसीटीई की गाइड लाइन है कि कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को अपर प्राइमरी टीईटी उत्तीर्ण अध्यापक ही पढ़ाएंगे। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है। हालांकि अदालत ने एलटी ग्रेड शिक्षकों को पढ़ाने से रोकने की मांग पर कोई आदेश नहीं दिया है।
हरेंद्र सिंह और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा छह से आठ के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा प्रशिक्षित स्नातक एलटी ग्रेड अध्यापकों को दिया गया है। जबकि 23 अगस्त 2011 को एनसीटीई द्वारा जारी अधिसूचना में प्राइमरी और अपर प्राइमरी विद्यालयों में टीईटी उत्तीर्ण अध्यापकों की नियुक्ति अनिवार्य है। याची ने मैनपुरी के जिला विद्यालय निरीक्षक से आरटीई में जानकारी मांगी थी जिसमें बताया गया कि जिले के सभी सहायता प्राप्त अशासकीय जूनियर हाईस्कूल की कक्षाओं में एलटी ग्रेड टीचर ही पढ़ा रहे हैं। संयुक्त निदेशक मेरठ ने भी आरटीई में ऐसी ही सूचना दी है।
याचीगण का कहना है कि वह बीएड और टीईटी उत्तीर्ण हैं तथा जूनियर हाईस्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए अर्ह हैं। इसलिए एलटी ग्रेड अध्यापकों को पढ़ाने से रोका जाए और याचीगण को नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने इस मामले में पक्षकारों को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का मौका दिया है तथा पूछा है कि जूनियर हाईस्कूलों में एलटी ग्रेड अध्यापक क्यों पढ़ा रहे हैं।