देवरिया शेल्टर होम कांड की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सरकार अनुदान क्यों देती है। सरकार एनजीओ को क्यों प्रमोट कर रही है। कोर्ट का कहना है कि कोई गैर सरकारी संस्था यदि समाज सेवा के कार्यों में शेल्टर होम या बाल कल्याण के कार्य करना चाहती है तो अपना पैसा न लगाकर सरकारी अनुदान पर क्यों आश्रित रहती है।
अदालत ने सरकार से जानना चाहा है कि क्या ऐसी संस्थाएं अपने कर्तव्य का पालन कर रही हैं। सरकार किसी संस्था को अनुदान देते समय क्या देखती है। क्या एनजीओ व्यवसाय कर रहे हैं।
स्वयोजित जनहित याचिका और स्त्री अधिकार संगठन सहित कई संस्थाओं की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि 2012 में बनी योजना प्रदेश में अब तक लागू क्यों नहीं की गई है।