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देवरिया शेल्टर होम केस: हाईकोर्ट ने पूछा, 'एनजीओ को क्यों दी जा रही है सरकारी सहायता'

Mon, 12 Nov 2018 10:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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फाइल फोटो
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देवरिया शेल्टर होम कांड की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सरकार अनुदान क्यों देती है। सरकार एनजीओ को क्यों प्रमोट कर रही है। कोर्ट का कहना है कि कोई गैर सरकारी संस्था यदि समाज सेवा के कार्यों में शेल्टर होम या बाल कल्याण के कार्य करना चाहती है तो अपना पैसा न लगाकर सरकारी अनुदान पर क्यों आश्रित रहती है।
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अदालत ने सरकार से जानना चाहा है कि क्या ऐसी संस्थाएं अपने कर्तव्य का पालन कर रही हैं। सरकार किसी संस्था को अनुदान देते समय क्या देखती है। क्या एनजीओ व्यवसाय कर रहे हैं।

स्वयोजित जनहित याचिका और स्त्री अधिकार संगठन सहित कई संस्थाओं की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि 2012 में बनी योजना प्रदेश में अब तक लागू क्यों नहीं की गई है।
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देवरिया के मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित शेल्टर होम में लड़कियों के यौन शोषण के मामले को लेकर निलंबित देवरिया कोतवाली प्रभारी ने याचिका दाखिल कर अपने निलंबन को चुनौती दी थी।

कोतवाल का कहना था कि उनकी नियुक्ति घटना के बाद हुई है, इसलिए निलंबन गलत है। कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए कोतवाल को अपना पक्ष आईजी के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। आईजी गोरखपुर को छह सप्ताह में प्रत्यावेदन निस्तारित करने का निर्देश दिया है।

एक अन्य संस्था ने याचिका दाखिल कर अनुदान रोके  जाने को चुनौती दी थी। संस्था का कहना था कि उसके खिलाफ जांच चल रही है, जिसकी वजह से दो साल से अनुदान नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए प्रदेश सरकार से पूछा है कि सरकार अनुदान लेने का वैधानिक अधिकार क्या है। अनुदान रोकने से संस्था को कोई क्षति नहीं हुई है। देवरिया शेल्टर होम मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
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