हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि वह एक वर्ग विशेष के लोगों पर दर्ज आपराधिक मुकदमे ही क्यों वापस ले रही है। इस सवाल का जवाब देने के लिए अदालत ने प्रमुख सचिव न्याय/एलआर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ तलब किया है। सरकार से पूछा है कि उसने पिछले दो वर्षों में कितने मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया है।
बलिया जिले के बांसडीह निवासी रामनारायण यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति दिनेश गुप्ता की खंडपीठ ने सरकार से रिकार्ड तलब किए हैं। याची का कहना था कि उसके विरुद्ध आपराधिक न्याय भंग का मुकदमा दर्ज था, जिसमें पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। अब सरकार ने मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया है। याची ने अधीनस्थ अदालत को उसके मामले का शीघ्र निस्तारण करने का आदेश देने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि मुकदमा वापसी का निर्णय लेते समय शिकायतकर्ता को भरोसे में नहीं लिया गया। पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इन तमाम स्थितियों के मद्देनजर कोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय को तलब कर जवाब मांगा है।