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प्रदूषण पर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट फर्जी

Sat, 14 May 2016 01:35 AM IST
अमित सरन, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आख़िर समंदर का स्तर कितना ऊंचा उठ सकता है? - फोटो : BBC
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी जिस रिपोर्ट में शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में दूसरे पर नंबर पर ग्वालियर और तीसरे नंबर पर इलाहाबाद को रखा है, वह रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में है। मौके पर अध्ययन किए बगैर यह रिपोर्ट क्लीन एयर एशिया नामक संस्था की ओर से ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों का कहना है कि मौके पर अध्ययन किए बगैर तैयार की गई रिपोर्ट फर्जी है। क्लीन एयर एशिया संस्था के इंडिया कोऑर्डिनेटर समीर कुमार ने भी ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पुष्टि की है कि संस्था ने मौके पर कोई अध्ययन नहीं किया है।
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डब्ल्यूएचओ ने 2012 के आंकड़ों के अनुसार प्रदूषण की रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में खलबली मच गई। यह बात पचा पाना मुश्किल हो गया कि दुनिया भर में 194 देशों के 25 लाख कस्बों और शहरों में ग्वालियर, इलाहाबाद शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में कैसे शामिल हो गए, जबकि दुनिया में दस लाख से अधिक आबादी वाले 499 शहरों में इलाहाबाद 370वें नंबर पर है। इलाहाबाद में न तो कोई इंडस्ट्री है और न ही वाहनों की भीड़। हरियाली के कारण ही इलाहाबाद को ग्रीन सिटी भी कहा जाता है। सिर्फ यूपी की बात करें तो प्रदेश में 773 और भारत में 5161 शहर हैं। 

आबादी के लिहाज से भी दुनिया के तमाम शहरों से इलाहाबाद बहुत पीछे है। जापान में टोकियो-याकोहामा की आबादी चार करोड़ से ऊपर है। इंडोनेशिया में जकार्ता शहर की आबादी तीन करोड़, भारत में दिल्ली की आबादी ढाई करोड़, फिलिपींस मे मनीला की दो करोड़ 41 लाख, यूनाइटेड स्टेट्स में न्यूयॉर्क की दो करोड़ 37 लाख, चीन में शंघाई की दो करोड़ 34 लाख, पाकिस्तान में कराची शहर की आबादी दो करोड़ 21 लाख और चीन में बीजिंग की आबादी दो करोड़ 10 लाख है, जबकि इलाहाबाद शहर की आबादी महज 12 लाख 94 हजार है। आबादी के अनुपात में वाहनों की संख्या भी अन्य शहरों के मुकाबले इलाहाबाद में काफी कम है। ऐसे में इलाहाबाद को दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल किया जाना किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा।
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‘इस पूरे मामले में डब्ल्यूएचओ से ज्यादा दोषी क्लीन एयर एशिया संस्था है। संस्था का कार्यालय दिल्ली स्थित लोधी रोड पर है। संस्था के इंडिया कोऑर्डिनेटर से मेरी फोन पर बात हुई। उन्होंने बताया कि संस्था ने इलाहाबाद आकर कोई अध्ययन नहीं किया है। उनसे यह पूछा गया कि आंकड़े कहां से लिए तो संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। भौगोलिक स्थित और यहां के पर्यावरण पर बिना अध्ययन किए तैयार की गई रिपोर्ट की कोई विश्वसनीयता नहीं है। रिपोर्ट फर्जी है।’ एसबी फ्रैंकलीन, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी

‘यह बात सही है कि संस्था की ओर से मैं या कोई दूसरा सदस्य इलाहाबाद नहीं आया। हमने अलग-अलग वेबसाइटों के माध्यम से विभिन्न शहरों के प्रदूषण से संबंधित आंकड़े इकट्ठा किए और अपनी वेबसाइट पर उसे जारी किए। एक डाटा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट से भी लिया गया। डब्ल्यूएचओ ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट की विश्वसनीयता के बारे में संस्था कोई टिप्पणी नहीं कर सकती है। इस बाबत डब्लयूएचओ ही बता सकता है।’ समीर कुमार, क्लीन एयर एशिया के इंडिया कोऑर्डिनेटर एवं शोधार्थी
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