प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में विख्यात महाकवि सुमित्रानंदन पंत का एक बंगले में इंतजार कभी पूरा नहीं हुआ। वह बंगला कोई और नहीं मुंबई स्थित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का है, जिसे दुनिया प्रतीक्षा के नाम से जानती है। अपने गहरे पारिवारिक मित्र पंत के इंतजार में उस बंगले का नाम हरिवंश राय बच्चन की सलाह पर अमिताभ बच्चन ने रखा था।
उत्तराखंड के कौसानी में पैदा हुए सुमित्रानंदन पंत की प्रयागराज कर्मभूमि रही है। वह लंबे समय तक प्रतापगढ़ के कालाकांकर में रहे, लेकिन उनकी इच्छा इलाहाबाद में रहने की थी। अंतत: 1940 में वह इलाहाबाद आए तो अपने करीबी नरेंद्र शर्मा के साथ नया कटरा स्थित दिलकुशा में रहने लगे। वहीं हरिवंश राय बच्चन भी रहते थे। कुछ दिनों में ही बच्चन से इतनी नजदीकी हो गई कि फिर वह बच्चन के साथ ही रहने लगे। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा ‘नीड का निर्माण फिर‘ में भी पंत से अपने संबंधों को रेखांकित किया है।
वह लिखते हैं कि पहली मुलाकात में ही पंत जी ने तेजी को और तेजी ने पंत जी को समझ लिया था। उनकी कविताओं और उनके अपने पूर्व संबंधों को मैं तेजी को पहले ही परिचित करा चुका था। वह लिखते हैं कि पंत का इरादा इलाहाबाद में रहने का था। तेजी ने उनको आमंत्रित किया कि वह हमारे साथ आकर रहें। पंत ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। वे दूसरे दिन अपने सामान के साथ मेरे यहां आने वाले थे।