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पट्टी कोतवाली कहां है भाई साहब...

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पट्टी कोतवाली का पेंटिंग के दौरान मिटाया गया नाम। - फोटो : PRATAPGARH
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इस हाईटेक जमाने में भी कोतवाली पट्टी पुराने ढर्रे पर चल रही है। कई महीनों से प्रवेश द्वार पर कोतवाली का नाम तक नहीं लिखाया जा सका। शिकायत लेकर आने वाले बाहरी लोगों को पता ही नहीं चल पाता। लोग उसे सरकारी कार्यालय समझने की भूल कर आगे बढ़ जाते हैं।
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पट्टी कोतवाली भवन में कई माह पूर्व साफ सफाई व रंगाई पुताई पूर्व कोतवाल ने कराई थी। कोतवाली के मुख्य भवन पर रंगाई होने के बाद नामपट्टिका लिखाना पुलिस भूल बैठी। आलम यह है कि तब से लेकर अब तक आला अधिकारियों की कोतवाली में बैठके भी होती रहीं लेकिन इस ओर ध्यान देना अफसरों ने मुनासिब न समझा।
पट्टी कोतवाली परिसर में प्रवेश करने वाला बाहरी आदमी पहले तो हैरत में पड़ जाता है। कभी कभार तो वह आगे बढ़ जाता है और लोगों से कोतवाली के बारे में जानकारी करने लगता है। इस मामले में कुछ लोगों ने कोतवाली प्रभारी को सलाह भी दी लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।
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स्वच्छ भारत मिशन की पट्टी कोतवाली में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 14 महिला आरक्षियों की तैनाती के बावजूद परिसर में पेयजल व शौचालय की व्यवस्था बद से बदतर हालत में है। कोतवाली परिसर के ठीक बगल बदबू गंदगी से पुलिसकर्मियों को गुजरना पड़ता है। क्षतिग्रस्त अस्थाई मूत्रालय से दुर्गंध उठती रहती है। परिसर के ठीक पीछे लगा सरकारी हैंडपंप भी खराब पड़ा है। सुरक्षा का पाठ पढ़ाने वाली कोतवाली पुलिस में जरूरी संसाधनों का अभाव है।
एक साल से खराब है तीसरी आंख
पट्टी कोतवाली पुलिस द्वारा कस्बे की निगरानी तीसरी आंख से करने का दावा किया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि एक साल से तीसरी आंख काम करना बंद कर दिया है। पट्टी कोतवाली में लगा सीसीटीवी कैमरा खराब है। थाने में होने वाली बैठकों में व्यापारियों से कहा जाता है प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाएं। जिससे अपराधियों को चिन्हित करने में मदद मिल सके।
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