मादक पदार्थों की तस्करी के मामले जेल में निरुद्ध राजेश मिश्रा की जमानत अर्जी में लगाए कागजात सत्यापन के लिए पुलिस के पास आए थे। मामले की जानकारी के लिए राजेश का बेटा विनायक शुक्रवार की शाम थाने पहुंच गया। पुुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की तो उसने कुछ विरोधाभासी बयान दिए। इससे पुलिस को वर्तमान में भी अवैध कारोबार के संचालन का शक गहरा गया और शनिवार की सुबह कार्रवाई हो गई।
आरोपी राजेश की जमानत के लिए पड़ोसी राजेंद्र मौर्या के आधार कार्ड और जमीन के कागजात लगाए गए थे। सत्यापन के लिए पुलिस पहले से ही राजेंद्र से पूछताछ कर चुकी थी, जिसमें उसने बताया कि किस तरह से उसका गलत इस्तेमाल किया गया। इधर विनायक पहुंचा अभिलेखों के बारे में सवाल -जवाब शुरू हुए तो फंस गया। इसके बाद रात में ही पुलिस ने राजेश के मकान की घेराबंदी के लिए सिपाहियों को लगा दिया। कार्रवाई का अंदाजा राजेश की पत्नी रीना मिश्रा को भी हो गया था। रात में विनायक के न पहुंचने पर रीना ने पड़ोसी अजीत मिश्रा के बेटे अंश मिश्रा को अपने घर में सुरक्षा की दृष्टि से बुला लिया था।
पिता भी करते थे नशीले पदार्थ की बिक्री
पुलिस के अनुसार राजेश मिश्रा के पिता रामजी मिश्रा भी मादक पदार्थों को बेचने का काम करते थे। राजेश पिता के साथ इस धंधे में उतर गया। करीब दस साल पहले पिता की मौत के बाद राजेश ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ा दिया। वह नशीले पदार्थों की थोक सप्लाई करने लगा। आसपास के लोगों को ही फुटकर गांजा, स्मैक दिया करता था।
अम्मा के नाम से आज भी बनी है पहचान
मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले राजेश मिश्रा की बुजुर्ग मां राम प्यारी अम्मा के नाम से मशहूर हैं। पुलिस का कहना है कि काफी लंबे समय से नशीला पदार्थ खरीदने वाले अम्मा का नाम ही लेते थे। उनका कहना था कि कहीं चाहे न मिले लेकिन अम्मा के पास नशीला पदार्थ जरूर मिलेगा। चूंकि वह उम्रदराज हैं इसलिए पुलिस भी उन पर शक नहीं करती थी।