राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने कहा कि जन सूचना अधिकारी 30 दिन के अंदर सूचना ज़रूर दें, अगर सूचना अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार देने योग्य नहीं है तो उसकी भी जानकारी सूचना मांगने वाले को ज़रूर दें। सूचना मांगने के आवेदन पर चुप्पी साधना ठीक नहीं।
राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम का कहना है कि जिलों में जन सूचना अधिकारी और उसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्तर से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आम जन को सूचना नहीं मिलती है तो इस धारणा को बल मिलता है कि कुछ गलत है, जिसको छिपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी 30 दिन के अंदर सूचना ज़रूर दें, अगर सूचना अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार देने योग्य नहीं है तो उसकी भी जानकारी सूचना मांगने वाले को ज़रूर दें। सूचना मांगने के आवेदन पर चुप्पी साधना ठीक नहीं।
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मोहम्मद नदीम शनिवार को प्रयागराज में समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर रहे थे। राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि मार्च में आयुक्तों की नयी टीम ने जब कार्यभार सम्भाला तो उन्हें 30 हजार लंबित वाद मिले, जो इस बात का दर्शाता है जिला स्तर पर सूचनाएं ना मिलने पर ही द्वितीय अपील के रूप में यह वाद आयोग के समक्ष आए।
लंबित वादों के निस्तारण के साथ साथ नयी अपील के रूप में जो अपील दर्ज हो रही हैं उन्हें भी समयबद्ध तरीके से निपटना आयोग की प्राथमिकता है। सूचना आयुक्त ने कहा कि आयोग में जिस जिले की अपील ज़्यादा आएंगी समझा जाएगा की उस जिले के अफसर आरटीआई कानून के प्रति गंभीर नहीं हैं। ऐसे अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दंडित रहने के लिए तैयार भी रहना चाहिए।
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राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि विभागों को सूचना मांगने वालों को अच्छे नजरिए से देखना चाहिए, “जब कुछ ग़लत किया नहीं तो डर किस बात का “ यह भाव रखना चाहिए। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने विभाग में लंबित सूचना के आवेदनों और उनके निस्तारण की स्थिति से अवगत कराया।