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गेहूं खरीद में बाधा : अभी मात्र आठ प्रतिशत किसानों का पंजीकरण

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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से परेशान किसानों की मुश्किलें आगे भी दूर होती नहीं दिख रहीं। सरकारी क्रय केंद्रों पर उनकी गेहूं बेचने की राह आसान नहीं होने जा रही। लॉकडाउन की वजह से किसानों का रजिस्ट्रेशन ही प्रभावित हो गया है। अभी तक मात्र आठ प्रतिशत किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। जबकि, गेहूं की बिक्री के लिए यह अनिवार्य है।
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गेहूं की कटाई जोराें पर है। सरकार ने कृषि कार्यों को अनिवार्य सेवाओं में शामिल कर लिया है। कृषि उपकरणों की आवाजाही पर भी कोई रोक नहीं है। ऐसे में विगत एक सप्ताह में कटाई और मड़ाई में और तेजी आई है, लेकिन किसानों के सामने रजिस्ट्रेशन की चुनौती बनी हुई है। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष जिले में कुल 40097 किसानों ने पंजीकरण कराया था। 10 अप्रैल तक इनमें से 8027 ने पंजीकरण कराया था। इसके विपरीत इस वर्ष अभी तक एक हजार किसानों ने भी पंजीकरण नहीं कराया है।
फिलहाल मात्र 64 क्रय केंद्रों पर होगी गेहूं की खरीद
जिले में गेहूं खरीद 15 अप्रैल से शुरू होगी। शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद ने सोमवार तक सभी तैयारियां पूरी कर लेने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेहूं लाने, बोरी आदि को लेकर किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। अफसरों ने बताया कि जिले में गेहूं खरीद के लिए अभी सिर्फ 64 केंद्र ही चिह्नित किए गए हैं। जबकि, पिछले वर्ष 100 से अधिक केंद्रों पर खरीद हुई थी। इन 64 में विपणन विभाग के 22, पीसीएफ के 20केंद्र हैं। कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, यूपी एग्रो के सात, यूपीएसएस के छह तथा एफसीआई के चार केंद्र बनाए गए हैं।
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