इसी रवैये से मदद नहीं करते हैं लोग
सरकारी तंत्र के इसी रवैये के कारण चाहते हुए भी लोग मदद के लिए आगे नहीं आते। इसी कारण गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल तक पहुंचाकर जान बचाने में पुरस्कार देने की योजना भी फलीभूत नहीं हो पा रही। सवाल है कि जब अस्पताल का काम ही इलाज करना है तो सोनाली को इतनी जद्दोजहद क्यों करनी पड़ी। सवाल उन दुकानदारों से भी है, जो खुद बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचा सकते थे, लेकिन आगे नहीं आए। जब एक छात्रा ने पहल की तो सारा जिम्मा उसी पर डाल दिया। सवाल उन राहगीरों से भी है, जिन्होंने बुजुर्ग को देखकर भी अनदेखा किया।