नगर निगम यमुना बैंक रोड स्थित जिस रैन बसेरा के बिलकुल दुरुस्त और साफ सुथरा होना का दावा कर रहा है, उसके दरवाजों को दीमक चाट गई है और खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। मुंडेरा, इलाहाबाद जंक्शन के सामने, फाफामऊ चुंगी के पास के रैन बसेरों की स्थिति भी ठीक नहीं हैं। किसी में ताला बंद हैं तो कहीं दुकानदारों ने रैन बसेरा में सामान रखा है। इनमें गंदगी का अंबार भी लगा है। अलाव का भी कमोबेश यही हाल है। दावा किया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, प्रमुख चौराहों के साथ आवश्यकता के हिसाब से अन्य स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है लेकिन कुछ स्थानों को छोड़ दें तो शहर के ज्यादातर हिस्सों में यह दिखाई नहीं दे रहा है।
शहर में ठंड की मार लगातार बढ़ी रही है। गरीब, रिक्शा और ट्राली चालकों के साथ राहगीर सर्द रातों में ठिठुर रहे हैं लेकिन शहर में रैन बसेरों से लेकर अलाव की व्यवस्था माकूल नहीं है। यहां सवाल यह है कि जब अफसरों को पहले से पता रहता है कि ठंड कब से शुरू होगी तो इन इंतजामों में देरी क्यों की जाती है। दूसरे उच्चाधिकारी भी रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था मुकम्मल करने के लिए लगातार निर्देश देते रहते हैं फिर इस काम में लापरवाही क्यों हो रही है। अफसरों के पास इसका जवाब नहीं है। रैन बसेरों का रखरखाव देखने वाले नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान दावा कर रहे हैं कि उनकी स्थिति ठीक है लेकिन सच्चाई इसकी बिलकुल उलट है। अलाव की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता लोकेश जैन के पास है। उनका कहना है कि आवश्यकता के हिसाब से इसकी व्यवस्था की जा रही है लेकिन यह कहां हो रहा है, कम ही नजर आ रहा।
अलाव के लिए जिला प्रशासन नहीं गंभीर
शहर में अलाव की व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके लिए लकड़ी का टेंडर काफी पहले होना चाहिए लेकिन अफसर ऐसा नहीं करते। ठंड बढ़ने पर वन विभाग से लकड़ी खरीदी जाती है और कहा जाता है कि सरकारी दर पर लकड़ी ले रहे हैं। अफसरों को जब ठंड पड़ने का पहले से अनुमान रहता है तो टेंडर कराके लकड़ी क्यों नहीं खरीदी जाती, यह बड़ा सवाल है। इसे लेकर जिला प्रशासन जरा भी गंभीर नहीं है, जबकि पिछले कुछ दिनों में कई अधिवक्ता संगठन और सामाजिक संगठनों ने डीएम से भी अलाव की व्यवस्था की मांग की है।
पुलिस बूथ पर अलाव आम लोगों के लिए नहीं
नगर निगम की ओर से सिविल लाइंस चौराहा, हनुमान मंदिर चौराहा, घंटाघर, नखास कोहना, खुल्दाबाद, मीरापुर आदि पुलिस बूथों के पास अलाव की व्यवस्था की गई है। इन स्थानों पर समय से अलाव जल जाता है लेकिन यहां पुलिस के कारण आम आदमी सर्दी से बचने के लिए यहां जाने से डरता है।
नगर निगम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 10 अस्थाई रैन बसेरों का निर्माण तो करा दिया है लेकिन इसमें किसी प्रकार की सुविधा नहीं है। इनमें केयर टेकर भी नहीं रखा गया है। नगर निगम ने इन रैन बसेरों के निर्माण से लेकर संचालन तक का ठेका वाराणसी के एक टेंट व्यवसायी को दिया है। असंगठित कर्मकार श्रमिक यूनियन ने नगर आयुक्त के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। यूनियन की बुधवार को रामबाग में हुई बैठक में कहा गया कि पीडी टंडन पार्क, पत्थर गिरजाघर, लक्ष्मी चौराहा, लेबर कोर्ट के सामने, सीएमपी के पास, तेलियरगंज, नैनी, अलोपीबाग आदि में बने रैन बसेरों में अब तक कोई इंतजाम नहीं है।