लालगंज क्षेत्र के शिवपुर गंगा घाट पर बने अंत्येष्ठि स्थल पर खड़े जानवर
देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हुए लॉक डाउन का असर यह है कि निधन के बाद अभागे लोगों को अंतिम सफर पर अपनों का साथ भी नहीं मिल पा रहा है। झूंसी के श्मशान घाटों पर पिछले दस दिनों से ही यही स्थिति बनी हुई है। झूंसी और हनुमानगंज के साथ ही जौनपुर व बादशाहपुर से निधन के बाद शव को लेकर गिनती भर लोग अंतिम संस्कार करने को घाट पर पहुंच रहे हैं।
लॉक डाउन के कारण पखवारे भर से सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपने घरों में कैद हैं। कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे मरीजों के कारण शहर के शहर सील किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा अभागे तो वो लोग हैं जिनकी मृत्यु लॉक डाउन के दौरान हो रही है। ऐसे लोगों को अंतिम सफर पर अपनों का साथ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लोगों के दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदार तो दूर शहर में रहने वाले रिश्तेदार भी अंतिम दर्शन को नहीं पहुंच पा रहे हैं।
गांव या फिर मोहल्ले के गिने-चुने लोग शव को लेकर झूंसी केछतनाग और नई झूंसी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने को पहुंच रहे हैं। पिछले दस दिनों से छतनाग और नई झूंसी श्मशान घाट पर यही स्थिति बनी हुई है। सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने को लोगों का ऐसा करना मजबूरी भी बन चुकी है। पिछले दस दिनों में छतनाग घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे कुछ शवों को तो चार लोगों के कंधे तक नसीब नहीं हो पाए हैं। ग्रामीण पिकप पर शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार किया।