याचिका में कहा गया था कि वे दोनों समलिंगी व बालिग हैं और एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं। कहा यह भी गया था कि उनके माता-पिता उन पर संबंध समाप्त करने को लेकर दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वे दोनों आपस में संबंध खत्म नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज करा कर उन्हें फंसा दिया जाएगा।
याचिका में उठाए गए इन तथ्यों पर विचार कर कोर्ट ने कहा कि वह लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह सभी पत्रजातों का परीक्षण कर याची लड़कियों को सुरक्षा मुहैया कराए। हाईकोर्ट ने पारित अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ग्यानी देवी बनाम सुपरिटेंडेट, नारी निकेतन दिल्ली तथा लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में दी गई विधि व्यवस्था का भी उल्लेख किया है।