मलाकराज वार्ड-13 के बैरहना में पानी की टंकी ट्रायल में भले ही फेल हो गई हो, लेकिन 12 साल बाद जलकल विभाग ने मोटर व कनेक्शन के नाम पर खेल कर दिया। पार्षद व स्थानीय लोगों को आरोप है कि चू रही टंकी को नजरअंदाज कर लाखों का बजट पास करा लिया गया।
मलाकराज वार्ड-13 के बैरहना में पानी की टंकी ट्रायल में भले ही फेल हो गई हो, लेकिन 12 साल बाद जलकल विभाग ने मोटर व कनेक्शन के नाम पर खेल कर दिया। पार्षद व स्थानीय लोगों को आरोप है कि चू रही टंकी को नजरअंदाज कर लाखों का बजट पास करा लिया गया। बैरहना के पुरुष पार्क के पास वर्ष 2012 में दो करोड़ रुपये की लागत से सीएनडीएस संस्था ने टंकी का निर्माण किया। इसके जरिये करीब 10 हजार से अधिक आबादी को पेयजल आपूर्ति होनी थी। मानकों के विपरीत बनी टंकी ट्रायल के दौरान फेल हो गई। उसमें लीकेज की समस्या पाई गई। काफी प्रयास के बाद समस्या दूर नहीं हो सकी तो टंकी उसी हालत में छोड़ दी गई थी।
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ऐसी स्थिति में मिनी नलकूप के जरिये लोगों को पेयजल आपूर्ति की जाने लगी। वहीं, 2024 में महाकुंभ-2025 के बजट के तहत मोटर लगाकर टंकी में कनेक्शन दे दिया गया। इसका स्थानीय पार्षद व लोगों ने विरोध किया था पर बजट के चक्कर में क्षतिग्रस्त पानी की टंकी में कनेक्शन दे दिया गया।आईईआरटी के पूर्व लेक्चरर व स्थानीय निवासी एसके शर्मा ने बताया कि टंकी बनाते समय 3-6 की जगह 3-1 की बालू-सीमेंट के मसाले का इस्तेमाल किया गया। कंक्रीट बिना धोए ढलाई में इस्तेमाल की गई। थर्ड क्वालिटी की सरिया का इस्तेमाल किया गया। इसकी वजह टंकी चूने लगी और पानी स्टोर करने में फेल हो गई।
टंकी वर्ष 2012 में बनकर तैयार हुई। ट्रायल के दौरान लीकेज पाया गया, फिर टंकी को बिना पानी भरे छोड़ दिया गया। ऐसे में 12 साल बाद क्षतिग्रस्त टंकी में मोटर लगाने और कनेक्शन देने का क्या मतलब है। - आकाश सोनकर, पार्षद मलाकराज