चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि सूबे के सभी राजकीय बालिका विद्यालयों में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर प्यूरीफायर (पानी साफ करने की मशीन) लगाई जाए। कोर्ट ने कहा कि शुद्ध पानी पीना अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह में स्कूलों में वाटर प्यूरीफायर नहीं लगाए जाते हैं तो जिलाधिकारियों के कार्यालय में लगे प्यूरीफायर उतार कर राजकीय बालिका विद्यालय में लगवा दिए जाएं। कोर्ट ने इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
विनोद कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि सभी बालिका विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन देना और शौचालय बनवाना भी सुनिश्चित किया जाए। कई जिलों के डीएम ने कोर्ट को हलफनामा देकर बताया कि बजट की कमी के कारण वाटर प्यूरीफायर नहीं लगवाया जा सका है। बजट मिलते ही इसे लगवा दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा सचिव ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि बजट मिलते ही वाटर प्यूरीफायर लगवाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बालिका विद्यालयों में लगाए जाने वाले वाटर प्यूरीफायर उसी गुणवत्ता के होने चाहिए जो जिलाधिकारी कार्यालय में लगे हैं। इस आदेश के पालन की रिपोर्ट के साथ अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा और जिलाधिकारियों को 24 अक्तूबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका में लड़कियों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मामला उठाया गया था। कोर्ट ने पीने के पानी के लिए स्कूलों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि जब अधिकारी वाटर प्यूरीफायर का पानी पी रहे हैं तो बच्चों को हैंडपंप का पानी क्यों पिलाया जा रहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी।