कुछ गांवों में ज्यादा खतरा
वैज्ञानिकों ने माना कि अगर भूजल रिचार्ज कम हुआ और पानी निकालने की रफ्तार बढ़ी तो शामली के लिलोन गांव में 12 मीटर से ज्यादा भूजल गिर सकता है। वहीं ताहरपुर, भाभीसा और जैसाला गांवों में भी पांच मीटर से अधिक गिरावट आ सकती है।
वर्षा जल संचयन से मिल सकती है राहत
शोधकर्ताओं ने भूजल संरक्षण के लिए कुछ सुझाव दिए हैं-
1. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाए
2. भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण लागू किया जाए
3. कृत्रिम पुनर्भरण परियोजनाएं शुरू की जाएं
4. सतही और भूजल का संयुक्त उपयोग बढ़ाया जाए
5. जल संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए