उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंडल के रेलवे अस्पतालों की छत और दीवारें सिर्फ ढांचा नहीं होंगी, बल्कि बिजली घर का काम करेंगी। पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा की बचत के लिए टूंडला स्थित रेलवे अस्पताल में अत्याधुनिक ऑनग्रिड बीआईपीवी (बिल्डिंग इंटीग्रेटेड फोटो वोल्टेइक) तकनीक वाला सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाएगा। इस परियोजना के सफल होने के बाद इसे अन्य रेल भवनों पर भी लागू किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ई-निविदा (ऑनलाइन टेंडर) जारी कर दी गई है। अगले माह निविदा खुलेगी और उम्मीद है कि अक्तूबर 2026 तक यह संयंत्र पूरी तरह से काम करने लगेगा। इस कार्य पर रेलवे लगभग 1.24 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। बताते चलें कि यह तकनीक सामान्य सौर पैनलों से बिल्कुल जुदा है। आमतौर पर छतों पर लोहे के स्टैंड लगाकर भारी-भरकम पैनल लगाए जाते हैं, जिससे छत की जगह घिर जाती है। वहीं, ऑनग्रिड बीआईपीवी तकनीक में सौर सेल सीधे इमारत के ढांचे (छत या दीवारों) का हिस्सा बन जाते हैं। यह सौर ऊर्जा तो पैदा करते ही हैं, साथ ही भवन की निर्माण सामग्री (जैसे टाइल्स या कांच) के रूप में भी काम करते हैं।
इसके लिए अलग से स्टैंड या ढांचे की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे छत पर जगह बचती है और इमारत बेहद आधुनिक भी नजर आती है। प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पहले से ही अग्रणी है। ऑनग्रिड प्रणाली जुड़ने से अस्पताल के भारी-भरकम बिजली बिल में न केवल कटौती होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम होने से प्रदूषण में भी गिरावट आएगी।