संगम किनारे बने किले की नींव सन् 1583 में अकबर ने रखी थी और यह किला लगभग साढ़े पैंतालीस वर्षों में बनकर तैयार हुआ था। किले की बाहरी दीवारों पर पौधे निकल आए हैं तो कई दीवारें दरक भी गई हैं।
संगमनगरी की पहचान बनी इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण की दरकार है। हालांकि इसकी जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है लेकिन भीतर सेना की मौजूदगी और सुरक्षा कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।