राजा मांडा नाम से चर्चित पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने इलाहाबाद से ही अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी। वर्ष 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सोरांव से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में वे तकरीबन 1100 मतों से जीते। इसी चुनाव में कौड़िहार से पहली बार राम पूजन पटेल ने भी एसएसपी के बैनर तले उम्मीदवार बने। राम पूजन भी अपना पहला चुनाव जीतने में कामयाब रहे, जबकि भारतीय जनसंघ ने पहली बार इलाहाबाद दक्षिण विधानसभा सीट को अपने नाम दर्ज कर ली।
1969 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहा। तब उसे इलाहाबाद जिले की सभी 14 विधानसभा सीटों पर कड़ी टक्कर मिली थी। मुख्य मुकाबला कांग्रेस का समयुक्ता सोशलिस्ट पार्टी (एसएसपी) और भारतीय जनसंघ से रहा। यह पहला मौका था जब कांग्रेस 14 में से पांच सीटें ही हासिल कर सकी थी। इस चुनाव में वीपी सिंह ने अपने सियासी सफर की शुरुआत की। सोरांव सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजय हासिल की। उन्होंने एसएसपी के राम आधार पांडेय को शिकस्त दी। शहर उत्तरी सीट से कांग्रेस के टिकट पर राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ने भी जीत की हैट्रिक बनाई।
हालांकि इस चुनाव में लगातार चार बार से निर्वाचित हो रहे हेमवती नंदन बहुगुणा को पराजित हो गए। बारा विधानसभा से भारतीय क्रांति दल के सर्वसुख सिंह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जनसंघ के लिए राहत की बात यह रही कि 69 के चुनाव में उसे इलाहाबाद में पहली बार दो सीटों पर जीत हासिल हुई। तब इलाहाबाद दक्षिण से संघ के टिकट पर राम गोपाल संड और चायल से कन्हैया लाल सोनकर निर्वाचित हुए। मंझनपुर सीट कांग्रेसी नेता धर्मवीर के खाते में आई। इस चुनाव में एसएसपी का भी प्रदर्शन बेहतर रहा। तब एसएसपी उम्मीदवारों ने बहादुरपुर, हंडिया, प्रतापपुर, कौड़िहार और सिराथू सीट पर जीत दर्ज की। कौड़िहार सीट से रामपूजन पटेल ने कांग्रेसी प्रत्याशी शिवा नाथ त्रिपाठी को शिकस्त दी थी। बाद में रामपूजन पटेल का पॉलटिकल ग्राफ भी तेजी से चढ़ा और वे केंद्रीय मंत्री भी बने।