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मंदिरों में दर्शन, घरों में जलाभिषेक

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प्रयागराज। सावन के दूसरे सोमवार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शिव मंदिरों में रंग-बिरंगे फूलों से शृंगार झांकियां सजाई जाएंगी। मंदिरों में दूर से ही देवाधिदेव का दर्शन हो सकेगा। जलाभिषेक और रुद्राभिषेक घरों में शिव प्रतिमाएं बनाकर श्रद्धालु करेंगे। सावन के दूसरे सोमवार की पूर्व संध्या पर भी दशाश्वमेध घाट पर सन्नाटा पसरा रहा। स्नान के मद्देनजर घाटों पर बैरिकेडिंग कराई गई है। डूबने से बचाने के लिए एसडीआरएफ के जवान तैनात कर दिए गए हैं। बंदी के बीच रविवार को सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा भोलेनाथ के दर्शन-पूजन के लिए शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई। कोरोना संक्रमण में प्रदेश सरकार की बंदी का असर अरैल में प्रसिद्ध सोमेश्वर महादेव मंदिर पर भी पड़ा। सावन के बावजूद सुबह आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया गया। शाम को भी पुजारियों ने ग्लब्स पहनकर गर्भगृह में सिर्फ आरती की। मंदिर केप्रधान पुजारी राजेंद्र पुरी ने बताया कि सोमवार पर दर्शन-पूजन की तैयारियां की गई हैं, लेकिन कोई उत्साह नहीं है। सावन सोमवार को बाबा की शृंगार झांकी सजाई जाएगी। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन मंदिर में सोमवार को दर्शन-पूजन प्रशासन पर निर्भर करेगा। सरस्वती घाट पर स्थित प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर में भी सोमवार को लेकर तैयारियां की गई हैं। हालांकि दो दिन की बंदी की घोषणा के बाद सेना ने इस मंदिर मार्ग के फाटक को बंद कर दिया है। इस वजह से रविवार को भी यहां दर्शन-पूजन बंद रहा, लेकिन पुजारी श्रीधरानंद ने बताया कि सोमवार को दो पालियों में सुबह सात से 11 बजे और शाम को तीन से रात आठ बजे तक मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। शाम को बाबा की शृंगार झांकी सजाई जाएगी।
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दारागंज में गंगा तट पर स्थित नागवासुकि मंदिर व बालसन चौराहा स्थित भरद्वाजेश्वर महादेव मंदिर में कोविड-19 के सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए भक्त भगवान के दरबार में हाजिरी लगाएंगे। इनसेट घाटों पर बैरिकेडिंग, एसडीआरएफ लगाई गई प्रयागराज। घाटों पर बैरिकेडिंग के बीच रविवार की शाम एससडीआरएफ केजवान तैनात कर दिए गए। दशाश्वमेध घाट पर दो मोटरबोट के साथ एसडीआरएफ के जवानों ने गश्त शुरू कर दी। हालांकि घाट पर शाम तक सन्नाटा पसरा रहा। तीर्थपुरोहितों की चौकियां खाली रहीं। तीर्थ पुरोहित अरुण शुक्ला ने बताया कि पहली बार सावन इतना सूना है। बाहर से जल भरने वाले नहीं आ रहे हैं। बाबा विश्वनाथ और वैद्यनाथ धाम के लिए जल भरने वाले कांवड़ियों ने अब तक दशाश्वमेध घाट पर दस्तक नहीं दी है। 
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