इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आंदोलनों में भीड़ द्वारा सड़क जाम कर हिंसा करना, कानून हाथ में लेकर पुलिस पर पत्थर, रॉड, लाठी आदि से हमला करना सभ्य समाज की जड़ पर हमला है। कोर्ट बिजनौर के श्योहरा थानाक्षेत्र में लगभग तीन सौ लोगों की भीड़ द्वारा पुलिस पर हमला करने के मामले में दाखिल चार्जशीट और सम्मन आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए आरोपियों की याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने लाए गए दस्तावेज को देखने से स्पष्ट है कि लोगों ने कानून की खुली अवहेलना की है। और पुलिस पर हमला किया गया है। कोर्ट ने साहसपीर गांव में हुई इस घटना के मामले में कहा है कि विचारण न्यायालय नियमानुसार कार्यवाही करेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने शहाबुद्दीन व अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों का कहना था कि वाहन चेकिंग में पुलिस को रुपये न देने के कारण उनको फर्जी केस में फंसाया गया है। सरकार की तरफ से कहा गया कि तीन लोग मोटर साइकिल से आ रहे थे ,रोकने पर उन्होंने वाहन नहीं रोका और एक कांस्टेबल को धक्का देकर घायल कर दिया।
कुल घायल चार लोगों को अस्पताल ले जाते समय दो से तीन सौ गाव के लोगों ने सड़क जाम कर पुलिस पर राड,लाठी से हमला किया।कई पुलिस कर्मी घायल हो गए।14मार्च 19 को हेड कांसटेबल राजवीर सिंह ने एफआई आर दर्ज कराई है। 31मई 19 को चार्जशीट दाखिल की गई है। जिसपर कोर्ट ने आरोपियों को सम्मन जारी किया है। इस सम्मन आदेश को चुनौती दी गई थी।