यमुनापार में नैनी इलाके में अवैध खनन रोकने गई पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने बृहस्पतिवार को अवैध खनन में लिप्त नावों को तोड़ा तो ग्रामीण उग्र हो गए। इसके जवाब में पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया, जिसमें महिलाओं समेत 30 से अधिक ग्रामीण चोटिल हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई न करके छोटे नाविकों की एक दर्जन से अधिक नावें तोड़ दीं। दूसरी ओर पुलिस की जेसीबी भी तोड़ दी गई। देर शाम पुलिस ने 200 से अधिक ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
यमुनापार में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के लिए बृहस्पतिवार को एडीएम प्रशासन, एसपी यमुनापार और खनन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने दोपहर से नैनी से लेकर घूरपुर तक कार्रवाई शुरू कर दी। नैनी में बसवार घाट और ठकुरी का पूरा के पास कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने पहले पुरानी बालू को जेसीबी से नदी में गिराया और वहां बंधी बोटों को तोड़ने लगी। तब तक सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए थे। नाव टूटती देख उन्होंने विरोध शुरू किया। बात बढ़ी तो पुलिस पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया।
प्रशासन जो जेसीबी ले गया था, उसे भी तोड़ दिया गया। इसके बाद तुरंत फोर्स को कॉल किया गया। ग्रामीणों पर लाठीचार्ज कर दिया गया। बालू मजदूरों का आरोप है कि पुलिस के लाठी चार्ज में तकरीबन 30 से अधिक लोग घायल हो गए। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। काफी देर तक हंगामा होता रहा। सूचना पर मजदूर सभा तथा अन्य संगठनों के लोग भी मौके पर पहुंच गए। लाठीचार्ज में घायल होने वालों का प्रारंभिक उपचार कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन असली खनन माफियाओं के साथ मिलकर गरीब मजदूरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उधर इंस्पेक्टर नैनी जीतेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस पर हमला कर जेसीबी को तोड़ा गया है। इस मामले में 200 से अधिक ग्रामीणों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
- पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग की टीमों ने आज यमुनापार के कई इलाकों में अवैध खनन रोकने की कारवाई की। इस दौरान नैनी में कुछ लोगों ने पुलिस के साथ उग्रता की। उनकी नावों से बालू लादकर लाई जा रही थी। जेसीबी को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसकी एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस दौरान संयम का परिचय दिया। - सौरभ दीक्षित, एसपी गंगापार
मजदूर सभा ने की मुआवजे की मांग
अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के जिला महासचिव राजकुमार पथिक ने कहा है कि एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने खोजी कुत्तों के साथ ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। 30 लोगों को पुलिस ने घायल किया। एक दर्जन से अधिक नावों को तोड़ दिया। लाठीचार्ज इसलिए किया गया कि गरीब मजदूरों ने नावें तोड़ने का विरोध किया था। राजकुमार ने नुकसान का मुआवजा देने और लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि 24 जून 2019 से प्रशासन ने नावों से बालू खनन प्रतिबंधित कर दिया जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं।