राजस्व परिषद के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिलों में 1 जुलाई से लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की गई है, ताकि ग्रामीणों के राजस्व संबंधी कार्यों का समयबद्ध निस्तारण हो सके। लेकिन भीरपुर क्षेत्र की ग्राम सभा मझुआ ,हर्रई आदि क्षेत्र के सभी ग्राम सचिवालय में इस व्यवस्था का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सोमवार को भी दोनों ग्राम सचिवालयों में न तो लेखपाल मौजूद मिले और न ही सचिवालय का ताला खुला। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब पांच वर्षों से ग्राम सचिवालय अधिकांश समय बंद ही रहता है, जिससे लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए तहसील और ब्लॉक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
सरकार की मंशा है कि ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ मिले। यहां पंचायत सहायकों के माध्यम से आय, जाति, निवास, हैसियत प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल सहित राजस्व विभाग की कई ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। इसके अलावा राजस्व संबंधी शिकायतों और अभिलेखों से जुड़े मामलों का भी त्वरित निस्तारण किया जाना है। लेकिन मझुआ और हर्रई में सचिवालय बंद रहने से ग्रामीणों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो लेखपाल नियमित रूप से सचिवालय पहुंच रहे हैं और न ही संबंधित अधिकारी स्थिति का संज्ञान ले रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि सचिवालय नियमित रूप से खुलें और अधिकारी उपस्थित रहें तो ग्रामीणों को काफी राहत मिल सकती है।
इस संबंध में जब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हर्षिका सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि ग्राम सचिवालय नियमित रूप से संचालित होने लगें तो शासन की योजनाओं का लाभ सीधे गांव तक पहुंचेगा और लोगों को अनावश्यक दौड़भाग से भी राहत मिलेगी।