इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच दूरी और बढ़ गई है। राष्ट्रपति की बैठक से मंगलवार को लौटे कुलपति ने बुधवार को कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया लेकिन वे नहीं माने। कर्मचारी अब संयुक्त परिषद तथा छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्रा को भी वार्ता में शामिल करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसके विपरीत कर्मचारियों के मुद्दे पर वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल में छात्रसंघ अध्यक्ष को शामिल करने पर विश्वविद्यालय प्रशासन सहमत नहीं है। ऐसे में गतिरोध बना हुआ और कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से लगातार आठवें दिन विश्वविद्यालय में कोई काम नहीं हुआ।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार कर्मचारियों का डीएसडब्ल्यू ऑफिस के सामने मैदान में जमावड़ा हुआ। उनके बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ.सिद्धार्थ सिंह भी पहुंचे। उनके संबोधन के बाद कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा। उनकी मांग थी कि मंत्रालय पूरे प्रकरण पर हस्तक्षेप करे।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पहले एक बजे वार्ता के लिए पत्र भेजा गया लेकिन कर्मचारियों के अनुरोध पर दो बजे वार्ता निश्चित की गई। विश्वविद्यालय की ओर से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष और महामंत्री को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन कर्मचारियों ने जवाब भेजा कि छात्रसंघ अध्यक्ष को भी वार्ता में शामिल किया जाए। मिनिस्टीरियल एंड टेकिभनकल स्टॉफ यूनियन के अध्यक्ष डॉ.संतोष सहाय का कहना है कि आंदोलन के लिए संयुक्त परिषद का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष रोहित मिश्रा है। इसलिए उन्हें भी वार्ता में शामिल किया जाए। वहीं पीआरओ प्रोफेसर हर्ष कुमार का कहना है कि कर्मचारियों के पत्र पर विचार के बाद निर्णय लिया गया कि सभी मुद्दे कर्मचारियों से संबंधित हैं।
इसलिए छात्रसंघ अध्यक्ष को वार्ता में शामिल करना विधिक रूप से अनुचित है। इस निर्णय से अवगत कराते हुए कर्मचारियों को फिर पांच बजे वार्ता के लिए बुलाया गया लेकिन वे नहीं आए। प्रोफेसर हर्ष कुमार का कहना है कि पूर्व में समन्वयक प्रोफेसर शंकर दयाल द्विवेदी, फिर रजिस्ट्रार ने वार्ता की कोशिश की थी लेकिन वे तैयार नहीं हुए। बुधवार को कुलपति स्वयं वार्ता के लिए दिन में 11 से पांच बजे तक बैठे रहे लेकिन वे नहीं आए। इससे प्रतीत होता है कि कर्मचारी मांग के प्रति गंभीर नहीं है और निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए छात्र-छात्राओं के हितों की जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।
गतिरोध दूर करने की इन कवायदों के बीच हड़ताल को अन्य संगठनों का भी समर्थन मिलने का क्रम जारी रहा। राज्य कर्मचार संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, कडे़दीन यादव, संजय कुमार याद ने भी आंदोलन का समर्थन किया। महिला छात्रावास से जुलूस बनाकर सभा स्थल पर पहुंची छात्राओं ने भी कर्मचारियों की मांग का समर्थन किया और कुलपति को हटाए जाने की उनकी मांग को जायज ठहराया।