महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं।
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अतिथियों को भेंट किया गया गीता और तुलसी का पौधा
अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, श्रीमद्भगवद्गीता और तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास की अध्यक्ष डॉ. कृष्णा गुप्ता ने चिन्मय मिशन के उद्देश्यों और आध्यात्मिक कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इसके बाद ब्रह्मचारिणी शाश्वती जी और विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से ‘गीता पंचामृतम्’ का लयबद्ध गायन किया। फिर हजारों कंठों से श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय के श्लोकों का सस्वर सामूहिक पाठ हुआ।
महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों का सामूहिक पाठ करते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला।
श्लोकों की गूंज से आध्यात्ममय हुआ वातावरण
पूरे परिसर में मंत्रोच्चार और श्लोकों की गूंज से आध्यात्मिक वातावरण बन गया। कार्यक्रम के दौरान चिन्मय मिशन की शपथ दिलाई गई। उपस्थित लोगों ने आयोजन को आत्मजागरण और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का अवसर बताया। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल ने आभार जताया। इसके बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता की आरती की। मंत्रोच्चार और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सहभागियों को प्रसाद स्वरूप ‘गीता पंचामृतम्’ पुस्तिका वितरित की गई। समापन पर बूंदी का प्रसाद बांटा गया। विशिष्ट अतिथि पूज्य स्वामी अभेदानंद जी, मुख्य अतिथि राजीव त्रिपाठी, एमएनएनआईटी प्रयागराज के मैकेनिकल विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव श्रीवास्तव, चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास की अध्यक्ष एवं महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता, विद्यालय समूह की प्रधानाचार्या अल्पोना डे, माधुरी श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य नित्यानंद सिंह, प्रधानाचार्या विभा श्रीवास्तव, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।