सत्यापन के दौरान सोरांव के 14, फूलपुर के 16 व हंडिया के 11 गांवों में खतौनी व काश्तकारों के नाम में त्रुटियां पाई गईं, जिन्हें संशोधित कर दिया गया है। संशोधित के बाद सभी 45 गांवों के सत्यापन से संबंधित फाइलें यूपीसीडा को वापस भेज दी गई हैं। दूसरे चरण में यूपीसीडी की ओर से 33 अन्य गांवों की फाइल विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को भेजी गई हैं, जिनका सत्यापन चल रहा है।
इसके बाद छह अन्य गांवों की फाइलें भी यूपीसीडा की ओर से भेजी जाएंगी। संशोधन आदि के बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर काश्तकारों की जमीन के बैनामे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बैनामा पूरा होने के बाद विंध्य एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में चार से पांच माह का वक्त लग सकता है।
इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। इससे अन्य राज्यों में सामान की आवाजाही तेज होगी। किसी भी देश की तरक्की के लिए उसकी आधारभूत संरचना होनी चाहिए। निश्चित रूप से इससे प्रयागराज के उद्योगों को आने वाले समय में बड़ा लाभ मिलने जा रहा है।
सरकार के इस फैसले का स्वागत है। विंध्य एक्सप्रेसवे बनने से छत्तीसगढ़, झारखंड आदि राज्यों से आने वाला सामान कम समय में यहां पहुंचेंगे। इससे प्रयागराज के कारोबार को फायदा होगा। हालांकि, सरकार से गुजारिश है कि टोल की दरें कम की जाएं। -राजीव नायर, अध्यक्ष, नैनी इंडस्टि्रयल एसोसिएशन
विंध्य एक्सप्रेसवे बनने से प्रयागराज का सफर छोटा हो जाएगा। रीवा रोड पर भी दबाव कम हो जाएगा। एक्सप्रेसवे बनने से पर्यटकों के भी समय में भी बचत होगी। होटल इंडस्ट्री को इससे विशेष फायदा होगा। -सुशील खरबंदा, अध्यक्ष, प्रयागराज ऑटोमोबाइल्स एसोसिएशन