जेठ अमावस्या शनिवार को सुहागिनों ने वट सावित्री का निर्जला व्रत रखा और वटवृक्ष की पूजा अर्चना कर अखंड सौभाग्य का वर मांगा। वट वृक्ष यानी बरगद के तले सुबह से व्रती महिलाओं का तांता लगा। कच्चा सूत बांध परिक्रमा कर वट की विधिविधान से पूजा की। कटरा कर्नलगंज, शिवकुटी, गोविंदपुर, दारागंज आदि मोहल्लों में बरगद के पेड़ के आसपास पटवा, फल, सुहाग सामग्री एवं मिठाई की दुकानें लगी रहीं।
सुबह होने से पहले घरों में पूजा की तैयारी की गई। सूर्योदय होने से पहले आटे और गुड़ के बरगद, पूड़ी, पुआ का नैवेद्य भोग प्रसाद बनाया गया। कच्चे सूत की माला बनाई गई और पूजा का थाल सजाया गया। सोलह शृंगार किया गया। देवी गीत गाते हुए बरगद के पेड़ तक का रास्ता तय किया गया। माली परिवार सहित सुबह से ही बरगद का टेहुरा पत्ता देने को पूजा स्थल पर मौजूद थे। सुहागिनों ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर बारह बरगद, पूड़ी, सुहाग सामग्री, हाथ का पंखा, मौसम के फल चढ़ाए। हल्दी चावल से रंगे कच्चे सूत की माला वट को चढ़ा कर पहनी गई। उसके बाद ग्यारह चना और एक बरगद का टेहुरा पानी से निगल अचल अहिवात का वर मांगा गया। घर आकर पति को हाथ के पंखे से हवा कर पैर छुए गए। घर की बड़ी बुजुर्ग से आशीर्वाद ले व्रत खोला गया।