इलाहाबाद। कवि-कहानीकार वसु मालवीय की अठारहवीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। मम्फोर्डगंज के नारायण अपार्टमेंट स्थित वसु के आवास पर जुटे परिजनों, मित्रों, सहकर्मियों ने उनसे जुड़ी स्मृतियां सहेजीं। इस मौके पर वसु के नाम पर तीस वर्ष तक के युवा कथाकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नवलेखन पुरस्कार शुरू किए जाने की घोषणा भी की गई।
वरिष्ठ गीतकार अग्रज यश मालवीय ने कहा, नवलेखन के बहाने वसु के कथाकर्म के संकल्प को पूर्णता मिलेगी। वसु को बचपन से ही कहानियां सुनने का शौक था, जिसे सुनते-सुनते वह कहानियां कहने में माहिर हो गया। उसके शब्द संसार में सामाजिक विसंगतियों और सरोकारों से जुड़े मुद्दे पूरी शिद्दत से शामिल हैं। उसमें कहानीकार की आत्मा बसती थी, तभी वह विवरणों में जाता था। ‘जनेऊ’ जैसी उसकी कहानी सामाजिक विषमताओं को बखूबी रेखांकित करती है।
इसी क्रम में अंशु मालवीय ने वसु की अप्रकाशित कहानी ‘जंगलराज’ का पाठ किया तो बेटे पुनर्वसु ने चार कविताओं के माध्मय से पिता को प्रणाम किया। साहित्यकार सुरेश कुमार शेष ने वसु के लंबे संघर्षशील जीवन और आनंद अग्रवाल ने वसु के बहाने ट्रेड यूनियन और साहित्य के रिश्ते को रेखांकित किया। प्रियदर्शन मालवीय ने ‘रह गईं अनुभूतियां, जो व्यक्त होने से, बोलती हैं कही भीतर किसी कोने से सहित वसु के प्रतिनिधि गीतों का पाठ किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर अनिता गोपेश, एहतराम इस्लाम, जयकृष्ण राय तुषार, आभा पांडेय, अनंत कुमार चित्रांशी, अनीता मालवीय, आरती मालवीय, ब्रजेश पांडेय आदि शामिल थे।