इलाहाबाद। इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए जो भी काम होंगे, उसमें अमेरिकी सरकार सीधे तौर पर रकम खर्च नहीं करेगी। इसके लिए अमेरिका की कंपनियां यहां निवेश करेंगी। साथ ही योजनाओं के आधार पर अमेरिकी कंपनियों से 50 प्रतिशत तक लोन भी मिलेगा। अमेरिका से आई पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को सरकिट हाउस में जिला प्रशासन सहित विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ बैठक में यह स्पष्ट कर दिया।
इस दौरान स्मार्ट सिटी के लिए विभागों की योजनाओं का प्रेजेंटेशन हुआ। हालांकि अमेरिकी टीम प्रेजेंटेशन के बजाए सीधे बातचीत करना चाह रही थी। ऐसा न होने पर टीम ने नाखुशी भी जताई। प्रेजेंटेशन के बाद टीम के सदस्यों ने नगर निगम के बसवार स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेटमेंट प्लांट और नैनी स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी निरीक्षण किया।
अमेरिकी के काउंसलर फॉर कॉमर्स अफेयर्स ढिल्लन बनर्जी, यूएसए ट्रेड एंड डेवलपमेंट के प्रोग्राम कोआर्डिनेटर नेहाल संघवी, यूएस ट्रेड डेवलपमेंट एजेंसी की प्रतिनिधि मेहनाज अंसारी, स्टेट डिपार्टमेंट में पीएएम ऑफिसर जोनायल केसलर एवं सीनियर कॉमर्स स्पेशलिस्ट भावना विश्वकर्मा के सामने नगर आयुक्त ने सिटी सेनिटेशन प्लान, कम्प्रेहेशिव मोबिलटी प्लान, सिटी डेवलपमेंट प्लान, गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम, सोलर एवं एलईडी स्ट्रीट लाइट, गंगा रीवर एवं घाट, जोनल वार्ड लेविल कमेटी, पर्यावरण सुरक्षा, नमामि गंगे सहित शहर के विकास के लिए अन्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
2040 तक शहर में शुद्ध पेयजल आपूर्ति की बात कही। रोडवेज की ओर से सिटी बस योजना पर चर्चा हुई। सीएनजी बसें चलाने के बारे में भी बताया। चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे काम न करने, बसे बढ़ाने पर पार्किंग और फ्लाईओवर की समस्या भी बताई। स्वास्थ्य विभाग ने छोटे अस्पताल बनाने अत्याधुनिक अस्पताल को लिए जमीन की जरूरी बताई।
बिजली विभाग ने स्मार्ट ग्रिड, अंडरग्राउंड केबिल, सब स्टेशन आदि के बारे में बताया तो ब्रिज कारपोरेशन ने फ्लाईओवर के बारे में जानकारी दी। बीएसएनएल ने व्यवस्था में तेजी से सुधार की बात कही। आनंद भवन, सिविल लाइंस कचहरी, इंदिरा भवन, कंपनीबाग आदि को फ्री वाईफाई से जोड़ने की बात भी कही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण खत्म करने के लिए पुरानी गाड़ियों को हटाने की बात कही। नेहाल संघवी ने कहा कि जो योजनाएं बनाएं, वह ऐसी हो जिस पर अमेरिकी कंपनी से 50 प्रतिशत तक लोन भी मिल सके। बैठक का संचालन अपर नगर आयुक्त वंदना त्रिपाठी ने किया।
महापौर अभिलाषा गुप्ता ने अमेरिकी टीम के सामने महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने स्मार्ट सिटी के लिए सभी विभाग तालमेल बनाकर योजनाएं तैयार करें। आवश्यकताएं बहुत हैं लेकिन वर्तमान में जो व्यवस्था है, उसमें सुधार की जरूरत है। कहा कि रीवर फ्रंट डेवलपमेंट में कई बस्तियां उजड़ेंगी, उन्हें बसाने की भी योजना बने।
कमिश्नर बीके सिंह कहा कि कुंभ इलाहाबाद की पहचान है। इसके लिए स्थायी काम होने चाहिए, ताकि कुंभ, माघ मेला में अस्थायी काम का झंझट न रहे। बताया कि हाईकोर्ट पानी फ्आईओवर के लिए सेना से जल्द एनओसी मिल जाएगी। इसके बाद काम शुरू होगा। एयरपोर्ट के लिए प्रयास चल रहा है। कहा कि अस्पताल कम सुविधाओं के बावजूद बेहतर काम कर रहे हैं।
डीएम कौशलराज शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए मोटी रकम चाहिए लेकिन पेयजल, ड्रेनेज, सीवरेज, कूड़ा-कचरा निस्तारण, यातायात, ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, ऊर्जा बचाने का प्रयास करना है। इन मूलभूत सुविधाओं पर काम हो भी रहा है। इसमें और सुधार की जरूरत है।
उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने एडीए की योजनाओं के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों से यह भी कहा कि आठ माह से स्मार्ट सिटी सुन रहे हैं, कई बैठकें हो चुकी लेकिन सतह पर कुछ नहीं है। अब काम करने की जरूरत है क्योंकि शहरी भी जानना चाहते हैं कि आखिर स्मार्ट सिटी में होना क्या है। उन्होंने निर्माणाधीन ग्रुप हाउसिंग का जिक्र किया। कहा कि शहरियों को दो हजार फ्लैट उपलब्ध होंगे। रीवर फ्रंट डेवलपमेंट, कंपनीबाग एवं हाथी पार्क का सौंदर्यीकरण, एमजी मार्ग, थार्नहिल रोड का सुधार, मल्टीलेविल पार्किंग के बारे में भी बताया।
यूएस ट्रेड डेवलपमेंट एजेंसी की प्रतिनिधि मेहनाज अंसारी ने कहा कि योजनाओं के लिए जो भी मास्टर प्लान बने, उसमें बेहतर कनेक्टिविटी रखनी होगी। इसमें क्या काम किया जा सकता है, विभाग बताएं। मास्टर प्लान बनाने में अमेरिका मदद करेगा। इसके लिए विश्व की बेहतर तकनीक मुहैया कराई जाएगी। योजना पर काम कितने वर्ष में पूरा होगा. यह भी तय हो ताकि निवेश करने वाली कंपनियों के सामने उसे रखा जाए। अमेरिकी टीम के साथ जल्द विशेषज्ञ आएंगे जो यहां तीन दिन रुककर विभिन्न योजनाओं पर चर्चा करेगें और बताएंगे कि क्या बेहतर हो सकता है।
अमेरिकी के काउंसलर फॉर कॉमर्स अफेयर्स ढिल्लन बनर्जी ने कहा कि स्मार्ट सिटी रातोंरात नहीं बनती। स्मार्ट सिटी का ढांचा बनाने का समझौता इसलिए हुआ है कि पर्यावरण, सुरक्षा, ऊर्जा सहित अन्य चीजों में विशेष सुधार हो। स्मार्ट सिटी के लिए टास्क फोर्स बन गई है। इलाहाबाद में स्मार्ट सिटी के लिए वर्कशॉप होगी। कई अमेरिकी कंपनियां निवेश को तैयार हैं।