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खत्म हो यूपीएसआईडीसी, प्राधिकरण दे जमीन

Sun, 20 Sep 2015 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडी) ने जबर्दस्त निराश किया है। औद्योगिक नगरी में उद्योग लगाने के लिए जमीन लेना आसमान से तारे तोड़ना जैसा है। जैसे-तैसे उद्योग लग भी गया तो कई तरह के टैक्स, बैंक की मनमानी ब्याज दरें, बिजली की किल्लत सहित सरकार की नीतियां उद्यमियों की कमर तोड़ देती हैं। ‘अमर उजाला’ की मुहिम ‘आइए करें मेक इन यूपी की बात’ में शनिवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में जुटे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से जुड़े उद्यमियों ने उद्योगों की बदहाली के लिए प्रदेश सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने यूपीएसआईडी को नकारा साबित करते हुए उसे खत्म करने और प्राधिकरण के जरिए उद्योगों के लिए जमीन आवंटन की बात कही।
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जुटे उद्यमियों ने दो टूक कहा, इलाहाबाद में उद्योगों की बर्बादी के लिए प्रदेश सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। त्रिवेणी शीट ग्लास, टीएसएल, एनएमडीसी, कॉटन मिल, स्लाइडर जैसी बड़ी कंपनियां बंद हो गईं। सरकारों ने उसे बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। नैनी में सरस्वती हाईटेक औद्योगिक टाउनशिप के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, औद्योगिक टाउनशिप के लिए उद्यमियों को भरोसे में नहीं लिया गया। औद्योगिक नगरी नैनी में ही काफी जमीन है। इसके अलावा फूलपुर, हंडिया में भी पर्याप्त जमीन है, उसे ही व्यवस्थित कर दिया जाए तो इलाहाबाद में उद्योगों का भला हो जाएगा।

बिजली की जबर्दस्त किल्लत, औद्योगिक नगरी में खस्ताहाल सड़कें, खराब बिजली व्यवस्था, मनमाना बिल, तरह-तरह के टैक्स, मनमानी बैंक ब्याज दरें जैसी दिक्कतों से उद्यमी परेशान हैं। और तो और सरकारी विभागों के रवैये की वजह से क्षुब्ध नई पीढ़ी अब कारोबार से दूर हो रही है। उद्यमियों के बच्चे अपने उद्योगों में रुचि नहीं ले रहे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन कारणों की ओर सरकारों का ध्यान भी नहीं है सो आज औद्योगिक नगरी नैनी में मात्र 15 फीसदी फैक्ट्रियां बची हैं। सरकार का रवैया ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होगी।
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जिला उद्योग विभाग के तैनात अफसर और कर्मचारियों में से ज्यादातर को उद्योगों के बारे में जानकारी ही नहीं है। उद्यमियों ने कहा, कोई नया व्यक्ति उद्योग लगाने के संबंध में वहां जानकारी लेने जाता है तो कर्मचारी उसे अपने चंगुल में फंसाने की कोशिश करते हैं। उद्यम के नाम पर उन्हें ईंट भट्टा लगाने की सलाह दी जाती है। सरकार स्किल डेवपमेंट की बात करती है लेकिन जिला उद्योग केंद्र में स्किल डेवपमेंट के लिए स्टॉफ नहीं है। इसके बाद भी उद्योग लगा लिया तो उद्यमी तीन-चार साल में कर्ज के बोझ से दब जाता है और उद्योग बंद हो जाता है।

मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समय-समय पर होने वाली उद्योग बंधु की बैठक में उद्योगों के विकास और राह में आ रही समस्याओं पर चर्चा नहीं होती। बैठक औद्योगिक नगरी में गंदगी, पेयजल संकट, टूटी-फूटी सड़कों जैसी समस्या तक सीमित रह गई है। उकेरे गई दिक्कतों का समाधान नहीं होता ऐसे में उद्योगों के विकास की बात तो दूर है।
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0 बिजली की जबर्दस्त कटौती से काम प्रभावित, 40 फीसदी नुकसान।
0 उद्योगों से जुड़े सभी विभागों के काम के लिए सिंगल विंडो सिस्टम न होना
0 फैक्ट्री में पांच आदमी काम करें या सौ, सबके लिए एक सा नियम
0 सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों ने लिए सरकारी नियम सरल न होना
0 फूड इंडस्ट्री के लिए फल, सब्जी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना
0 औद्योगिक नगरी में सुरक्षा के इंतजाम नहीं, घटना की एफआईआर तक नहीं होती
0 होटल व्यवसाय औद्योगिक इकाई लेकिन अब तक नहीं मिल सकीं सुविधाएं
0 इलाहाबाद से भोपाल समेत अन्य बड़े शहरों के लिए सीधी विमान सेवा नहीं
00 सुझावों पर अमल से आसान होगी राह
0 औद्योगिक नगरी समेत शहर में चल रही इकाइयों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति
0 उद्योगों से जुड़े करीब 18 विभागों का काम एक ही छत नीचे यानी सिंगल विंडो सिस्टम
0 छोटी और बड़ी फैक्ट्रियों में कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से बने नियम
0 शंकरगढ़ में बंद पड़ी सिलिका सैंड की फैक्ट्री एनएमडीसी खोली जाए
0 टीएसएल सहित बंद हो चुकी बड़ी फैक्ट्रियों को फिर से खोला जाए
0 होटल व्यवसाय को औद्योगिक इकाई का दर्जा दिया जाए।
0 इलाहाबाद से मुंबई, भोपाल समेत बड़े शहरों के लिए शुरू हो सीधी विमान सेवा
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