वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए 1.14 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। इस परीक्षा के लिए केंद्र और पाली निर्धारण को लेकर ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी, लेकिन गाइडलाइन में शामिल अन्य प्रावधानों का पालन तो करना ही होगा। जैसे प्रश्न पत्र दो प्रिंटिंग प्रेसों में अलग-अलग छपवाए जाएंगे। इनमें से कौन सा प्रश्न पत्र वितरित किया जाएगा, यह परीक्षा शुरू होने से पांच घंटे पहले तय होगा। प्रश्न पत्रों को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए लोहे के बक्से में रखा जाएगा।
नए आयोग को सभी भर्ती परीक्षाओं की सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग करानी होगी और इसके लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित करना होगा। परीक्षार्थियों को केंद्र आवंटन भी नई गाइडलाइन के अनुरूप ही करना होगा। आयोग को तीन प्रकार की ओएमआर शीट तैयार करानी होगी, जिनमें एक आयोग रखेगा, दूसरी कोषागार में संरक्षित रखी जाएगी और तीसरी अभ्यर्थी को दी जाएगी। प्रश्न पत्रों पर सीरीज अंकित नहीं होगी, बल्कि बार कोड होंगे ताकि किसी को भी सीरीज की जानकारी न हो सके।
नए आयोग को गाइडलाइन के अनुरूप ये तमाम इंतजाम करने में वक्त लगेगा। इसके लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ेगी। आयोग में तो अब तक स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति भी नहीं हुई है। स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक आयोग से जुड़े सभी नीतिगत निर्णय अटके रहेंगे। आयोग के सूत्रों का कहना है कि नई गाइडलाइन के अनुरूप परीक्षा कराने के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति होने के बाद परीक्षा संबंधी गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ेंगी।