टाइपिंग अभ्यास के लिए परीक्षार्थियों को मिलेगा अतिरिक्त समय
सहायक सांख्यिकी अधिकारी के अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष से मिलकर रखी अपनी बात
प्रयागराज। समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) परीक्षा-2017 के अभ्यर्थियों ने बुधवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष से मिलकर टंकण परीक्षा टाइप राइटर से कराने की मांग की। आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। हालांकि परीक्षार्थियों का दावा है कि आयोग अध्यक्ष ने कंप्यूटर पर टाइप के अभ्यास के लिए उन्हें अतिरिक्त समय देने की मांग स्वीकार कर ली है। साथ ही उन्होंने पीसीएस मुख्य परीक्षा के बाद टंकण परीक्षा कराने की बात मानी है। आयोग अध्यक्ष से मुलाकात करने वालों में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के अभ्यर्थी शामिल रहे।
इससे पहले आयोग अध्यक्ष से मुलाकात करने पहुंचे परीक्षार्थियों का कहना था कि उन्होंने आरओ-एआरओ परीक्षा के लिए 2017 में आवेदन किया था। आरओ-एआरओ भर्ती की मुख्य परीक्षा फरवरी 2019 में हुई थी, इसके बाद से परीक्षार्थी लोक सेवा आयोग की ओर से जारी विज्ञापन में दिए गए निर्देश के अनुसार टाइपराइटर पर टाइप का अभ्यास कर रहे हैं। आयोग की पूर्व की परीक्षाओं में भी टाइपराइटर पर ही टंकण परीक्षा हुई। अब अचानक आयोग की ओर से विज्ञप्ति जारी कर टंकण परीक्षा कंप्यूटर पर कराने की घोषणा कर दी। परीक्षार्थियों ने आयोग अध्यक्ष के सामने मांग रखी कि टंकण परीक्षा विज्ञापन के अनुसार पूर्व की भांति टाइपराइटर पर कराई जाए। परीक्षार्थियों का कहना था कि यदि कोई विकल्प नहीं है तो टंकण परीक्षा कंप्यूटर से कराने की स्थिति में उन्हें तैयारी के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष से मांग की कि कंप्यूटर पर टंकण की तैयारी के लिए कंप्यूटर पर टंकण टेस्ट का फॉन्ट घोषित किया जाए। परीक्षार्थियों का कहना था कि पीसीएस मुख्य परीक्षा के तीन महीने बाद आरओ-एआरओ टंकण परीक्षा कराई जाए।
साक्षात्कार के बाद प्रमाण पत्रों की जांच में बाहर हो गए दावेदार
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष से मुलाकात करने आए कई अभ्यर्थियों ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी के परिणाम पर सवाल उठाए। मुलाकात के दौरान एक अभ्यर्थी ने आयोग अध्यक्ष से पूछा कि आखिर साक्षात्कार के बाद बड़ी संख्या में पद खाली क्यों रखे गए। इस पर आयोग अध्यक्ष ने बताया कि उनकी मंशा तो पूरे पदों को भरने की थी परंतु साक्षात्कार के बाद रिजल्ट घोषित करने से पहले सभी सदस्यों का मत था कि परीक्षार्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच पूरी करवा ली जए। जांच में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र पर आपत्ति के बाद उन्हें अंतिम चयन से बाहर कर दिया गया।
मुलाकात के बाद अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा पास करने, साक्षात्कार देने और उसके बाद अंतिम चयन न होने और पद भी खाली छोड़ देने से पूरी भर्ती प्रक्रिया सवालों को घेरे में खड़ी होती है। परीक्षार्थियों का कहना है कि छह वर्ष के इंतजार के बाद जब परिणाम आया तो वह निराश करने वाला है। सवाल उठाने वालों में प्रभाकर, जावेद, नेहा, हिमांशु, नागेश सहित कई अभ्यर्थी शामिल हैं।