सीएवी इंटर कॉलेज से आरओ-एआरओ की परीक्षा देकर बाहर निकलते अभ्यर्थी।
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समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 में 42.21 फीसदी अभ्यर्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे पहले 11 फरवरी 2024 को हुई इसी परीक्षा में 64 फीसदी अभ्यर्थी शामिल हुए थे। तकरीबन सवा दो लाख अभ्यर्थी ऐसे हैं जो पिछली परीक्षा में तो शामिल हुए थे लेकिन डेढ़ साल बाद रविवार को हुई पुनर्परीक्षा उन्होंने छोड़ दी।
आरओ/एआरओ के 411 पदों पर भर्ती के लिए कुल 1076004 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। 11 फरवरी 2024 को यह परीक्षा प्रदेश के 58 जिलों के 2387 केंद्रों में हुई थी और इस बार पुनर्परीक्षा प्रदेश के सभी 75 जिलों के 2382 केंद्रों में आयोजित की गई जिसमें मात्र 42.21 फीसदी अभ्यर्थियों ने ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तकरीबन सवा दो लाख अभ्यर्थियों के पुनर्परीक्षा छोड़ने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। इस बार परीक्षा में काफी सख्ती की गई।
पूरी परीक्षा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की निगरानी में कराई गई। एक-एक अभ्यर्थी की हर हरकत पर एआई के माध्यम से बारीक नजर रखी जा रही थी। सख्ती का आलम यह रहा कि अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले हाथ में बंधा कलावा तक उतारना पड़ा। अंगूठी और चेन भी उतारनी पड़ गई। मोटरसाइकिल की चाभी तक साथ ले जाने की अनुमति नहीं मिली।
आंखों की पुतली से अभ्यर्थियों की पहचान की गई और प्रत्येक परीक्षार्थी की बायोमीट्रिक हाजिरी ली गई। पहली बार आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा एक सत्र में आयोजित की गई। पहले यह परीक्षा दो सत्रों में होती थी जिसमें सामान्य अध्ययन व हिंदी के प्रश्न पत्र होते थे लेकिन इस बार दोनों प्रश्न पत्रों को समायोजित करते हुए एक सत्र में तीन घंटे की परीक्षा आयोजित की गई।
प्रयागराज में 47.61 फीसदी रही उपस्थिति
आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 के लिए प्रयागराज में 106 केंद्र बनाए गए थे और 42032 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47.61 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। सर्वाधिक 52.81 फीसदी उपस्थिति अयोध्या और सबसे कम 25.78 फीसदी उपस्थिति रामपुर में रही। चित्रकूट में 52.60 फीसदी, गाजीपुर में 50.68, गोंडा में 52.32, जौनपुर में 51.68, अमेठी में 51.58, प्रतापगढ़ में 50.50, सीतापुर में 50.23 और लखनऊ में 48.89 फीसदी अभ्यर्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।