यूपीपीएससी ने कॉपियों को स्कैन किए जाने का बनाया था प्रस्ताव
कॉपियां नष्ट किए जाने के विवाद से बचने के लिए हुआ था निर्णय
प्रयागराज। पीसीएस-2015 की मुख्य परीक्षा की कॉपियों को नष्ट किए जाने के मामले ने जिस तरह से तूल पकड़ा, उसके बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की थी। कॉपियों को स्कैन कर हमेशा सुरक्षित रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया था और शासन को प्रस्ताव भेजा भी गया, लेकिन डेढ़ साल से यह प्रस्ताव शासन में अटका हुआ है और आयोग को बजट मंजूर होने का इंतजार है।
दो साल पहले सीबीआई ने जब यूपीपीएससी की परीक्षाओं की जांच शुरू की तो जांच एजेंसी ने भी कॉपियां नष्ट किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया। कॉपियां नष्ट किए जाने के साथ ही गड़बड़ी के तमाम सुबूत भी नष्ट हो जाते हैं और सीबीआई ने इसी पर आपत्ति जताई थी। इसी विवाद से निपटने के लिए आयोग ने कॉपियों को स्कैन कर उन्हें डिजिटली रूप से सुरक्षित रखने का निर्णय लिया था। कॉपियों को स्कैन करने के पीछे कुछ अन्य कारण भी थे। आयोग के कई कमरे कॉपियों से भरे पड़े हैं और इन्हें सुरक्षित रखने के लिए आयोग को पेस्ट कंट्रोल एवं अन्य मदों पर काफी खर्च करना पड़ता है।
विवादों से बचने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ही आयोग ने कॉपियों को स्कैन कर हमेशा सुरक्षित रखे जाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और स्टीमेेट बनाया गया था। डेढ़ साल पहले आयोग ने यह प्रस्ताव शासन को भेजा था। कॉपियों की स्कैनिंग का कार्य किसी एजेंसी के माध्यम से कराए जाने का प्रस्ताव था। हालांकि, इस पर काफी खर्च आना था, सो प्रस्ताव अब तक शासन में ही अटका हुआ है। आयोग को प्रस्ताव और बजट की मंजूरी का इंतजार है। आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि शासन से जैसे ही प्रस्ताव स्वीकृत होगा, इसे लागू कर दिया जाएगा।