प्रयागराज। पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा के परिणाम में रक्षा अध्ययन, समाजकार्य, इतिहास, दर्शनशास्त्र जैसे मानविकी विषयों के अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ इस बार तेजी से नीचे आया है। यह दावा उन अभ्यर्थियों का है कि जो इस परीक्षा में शामिल हुए थे। अभ्यर्थी यह आरोप भी लगा रहे हैं कि पीसीएस-2018 में स्केलिंग को लागू न किए जाने के कारण परिणाम प्रभावित हुआ है।
पीसीएस-2018 के अभ्यर्थियों ने भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह के नेतृत्व में कुछ आंकड़े जुटाए हैं। ये आंकड़े एक सर्वे के आधार पर अभ्यर्थियों ने ही इकट्ठा किए हैं। इन अभ्यर्थियों का दावा है कि रक्षा अध्ययन में पीसीएस-2016 में 26 फीसदी, पीसीएस-2017 में 25 फीसदी और पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में महज सात फीसदी अभ्यर्थी सफल हुए। इसी तरह समाज कार्यक्रम में क्रमश: 22, 20 एवं तीन फीसदी, इतिहास में 20, 20 एवं तीन फीसदी और दर्शनशास्त्र में 10, सात एवं एक फीसदी अभ्यर्थी सफल हुए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा में स्केलिंग न किए जाने के कारण मानविकी विषयों के अभ्यर्थियों को ग्राफ तेजी से गिरा है।
रक्षा अध्ययन और समाज कार्य विषय के अभ्यर्थियों को दोहरा झटका लगा है, क्योंकि पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से इन दोनों विषयों को हटा दिया गया है। अभ्यर्थियों का यह आरोप भी है कि स्केलिंग न होने के कारण ही हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के चयन का ग्राफ भी गिरा है। हालांकि यह दावा केवल अभ्यर्थियों से बातचीत के आधार पर जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है। यह कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह का कहना है कि अगर आयोग ने स्केलिंग पर लिखित जवाब नहीं दिया और रिजल्ट संशोधित नहीं किया तो इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में जाएंगे।