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पीसएस-2020: प्रश्नों का विवाद दूर करेंगे नए विशेषज्ञ

सार

  • आयोग ने शुरू की विशेषज्ञों के नए पैनल के गठन की तैयारी
  • यूपीपीएससी की वेबसाइट पर जारी किया गया आवेदन का प्रारूप
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पीसीएस-2020 से उत्तरकुंजी में संशोधन काम अब नए विशेषज्ञों के हाथों में होगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) विशेषज्ञों का नया पैनल तैयार करने जा रहा है। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं और आवेदन का प्रारूप आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। माना जा रहा है कि प्रश्नों के विवाद को दूर करने के लिए आयोग विशेषज्ञों का नया पैनल बनाने की तैयारी कर रहा है।

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आयोग ने पीसीएस-2019 की प्रारंभिक परीक्षा में उत्तरकुंजी को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब तक प्रारंभिक परीक्षा के साथ ही संशोधित उत्तरकुंजी जारी की थी, लेकिन इस बार आयोग ने निर्णय लिया कि पीसीएस-2019 का अंतिम चयन परिणाम आने के बाद कटऑफ अंक के साथ संशोधित उत्तरकुंजी जारी की जाएगी। हालांकि, आयोग पीसीएस-2019 की प्रारंभिक परीक्षा की उत्तरकुंजी पर आपत्ति लेने की प्रक्रिया पूरी कर चुका है और संशोधन के बाद ही आयोग ने रिजल्ट जारी किया, लेकिन पीसीएस की अगली परीक्षा से यह जिम्मेदारी नए विशेषज्ञों के पास होगी।



पिछली कई परीक्षाओं में लगातार देखने को मिला कि संशोधित उत्तरकुंजी से भी अभ्यर्थी संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्हें न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। ऐसे में आयोग के विशेषज्ञों की योग्यता को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे। आयोग के आठ पन्नों में जारी आवेदन के प्रारूप में अभ्यर्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर या अन्य व्यावसायिक अध्ययन के अनुभव का विवरण देना होगा।
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अभ्यर्थी ने अगर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) या अन्य राज्यों के आयोग में कार्य किया है तो उसका अनुभव भी बताना होगा। अगर किसी तरह की जांच का सामना कर चके हैं तो इसकी जानकारी भी देनी होगी। उधर, आयोग के सचिव का कहना है कि विशेषज्ञों का चयन नियमित प्रक्रिया है। समय-समय पर आवेदन लिए जाते हैं और अर्हता के अनुसार विशेषज्ञों का चयन होता रहता है।

पूर्व परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी भी बदलाव की वजह
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर आउट होने के मामले में पूर्व परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही उनके कंप्यूटर, मोबाइल आदि को भी जब्त कर लिया गया था। आयोग में विशेषज्ञों का चयन गोपनीय प्रक्रिया के तहत होता है और विशेषज्ञों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं। पूर्व परीक्षा नियंत्रक के मोबाइल पर विशेषज्ञों के फोन नंबर और नाम भी थे। ऐसे में विशेषज्ञों के नाम सार्वजनिक हो गए थे। आयोग में नए विशेषज्ञों के चयन की एक वजह यह भी मानी जा रही है।

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