पीसीएस में रक्षा अध्ययन, समाजकार्य सर्वाधिक स्कोरिंग
मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विषय को शामिल करने की मांग
प्रयागराज। लगातार दो पीसीएस परीक्षाओं में जिस विषय से टॉपर निकले, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने उसी विषय को पीसीएस की परीक्षा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। पीसीएस में रक्षा अध्ययन एवं समाजकार्य को सर्वाधिक स्कोरिंग विषय माना जाता था और आयोग ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से जिन पांच विषयों को हटाया, उनमें ये दोनों विषय शामिल हैं। प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि रक्षा अध्ययन एवं समाज कार्य विषय को मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।
हालांकि, आयोग ने यह बदलाव तब किया है, जब पीसीएस मुख्य परीक्षा में दो की जगह केवल एक वैकल्पिक विषय रह गया है। दोनों विषयों का कोर्स सीमित है और स्कोरिंग भी है। माना जा रहा है कि इसी वजह से आयोग ने अरबी, फारसी, कृषि अभियांत्रिकी के साथ रक्षा अध्ययन और समाज कार्य विषय को मुख्य परीक्षा से हटा दिया। हालांकि, इस पीसीएस-2017 के टॉपर रहे प्रयागराज अमित शुक्ला ने जिन दो वैकल्पिक विषयों के साथ परीक्षा दी थी, उनमें समाजकार्य विषय भी शामिल था और दूसरा विषय भूगोल था। अमित ने चयन के बाद कहा था कि उन्होंने समाजकार्य को इसलिए चुना, क्योंकि यह विषय स्कोरिंग है। इसके अलावा पीसीएस-2016 की टॉपर रहीं कानपुर की जयजीत सिंह होरा ने भी जिन दो विषयों के साथ मुख्य परीक्षा दी थी, उनमें समाजकार्य विषय भी शामिल था और दूसरा विषय लोक प्रशासन था।
रक्षा अध्ययन और समाजकार्य विषय को पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से हटाए जाने के कारण प्रतियोगी छात्र परेशान हैं। छात्रों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर रक्षा अध्ययन एवं समाजकार्य विषय की प्रासंगिकता से अवगत कराते हुए कहा है कि दोनों विषयें पिछले एक दशक से यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए प्रतियोगी छात्र के लोकप्रिय वैकल्पिक विषय रहे हैं और 60 से 70 फीसदी प्रतियोगी मुख्य परीक्षा में इन्हीं विषयों में कोई एक चुनते हैं। रक्षा अध्ययन राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित सबसे व्यवहारिक विषय है, जो वर्तमान युवा पीढ़ी के बौद्धिक स्तर को बढ़ावा देता है। एक प्रशासनिक अधिकारी समाजकार्य जैसे लोकप्रिय वैकल्पिक विषय में समस्या क्या है? कारण क्या है? उसकी पर्यावरणीय दशाएं क्या हैं? आदि का अध्ययन करता है तो निश्चित रूप से वह कार्यक्षेत्र में अपनी भूमिका का संपादन अन्य से बेहतर करेगा। समस्या को बखूबी समझते हुए सका निराकरण करेगा। प्रतियोगियों ने इन तमाम तर्कों के साथ सीएम से मांग की है कि दोनों विषयों को मुख्य परीक्षा में शामिल किया जाए।