कुछ अभ्यर्थियों की दावेदारी इसलिए निरस्त कर दी गई क्योंकि उन्होंने विज्ञापन की शर्तों के विपरीत आवेदन की अंतिम के बाद स्नातक की डिग्री हासिल की। मुख्य परीक्षा के आवेदन पत्र और हाईस्कूल के प्रमाणपत्र में अंकित जन्मतिथि में अंतर होने पर पांच अभ्यर्थियों की दावेदारी निरस्त कर दी गई। एक अभ्यर्थी ने तो आवेदन पत्र में पिता का मूल निवास स्थान ‘निल’ दिखा दिया और उत्तर प्रदेश के मूल निवासी में ‘नहीं’ अंकित किया।
इस अभ्यर्थी के पत्र व्यवहार एवं स्थायी पते में दिल्ली दर्शाया गया है। अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में सफल है जबकि आरक्षण का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के मूल निवासी को ही अनुमन्य है। आयोग के उप सचिव वीरेंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार अभ्यर्थन निरस्तीकरण के विरुद्ध अभ्यर्थी 15 सितंबर शाम पांच बजे तक या इससे पहले आयोग को पंजीकृत डाक या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आयोग के गेट नंबर तीन पर स्थित डाक अनुभाग के काउंटर पर अपना प्रत्यावेदन उपलब्ध करा सकते हैं।
आवेदन भेजा न अभिलेख, लिफाफे में रख दी सिर्फ पता पर्ची
आयोग ने एक अभ्यर्थी की दावेदारी इसलिए निरस्त कर दी क्योंकि उसने आयोग को मुख्य परीक्षा का आवेदन पत्र व शैक्षिक अभिलेख न भेजकर लिफाफे में केवल पता पर्ची प्रेषित कर दी।