राजकीय महाविद्यालयों की असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए अब पीसीएस की तर्ज पर तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की जाएगी। अब केवल इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन नहीं होगा, बल्कि उन्हें प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू देना होगा। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर अब तक सीधी भर्ती के तहत चयन होता था। स्क्रीनिंग परीक्षा तो कराई जाती थी लेकिन अभ्यर्थियों के चयन में स्क्रीनिंग परीक्षा के प्राप्तांक शामिल नहीं किए जाते थे। स्क्रीनिंग परीक्षा सिर्फ अभ्यर्थियों की छंटनी के लिए होती थी और इसके बाद केवल इंटरव्यू में प्राप्तांक के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन कर लिया जाता था।
इसपर पक्षपात के आरोप लगते थे और सवाल भी उठते थे कि केवल 10 मिनट के इंटरव्यू के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए किसी अभ्यर्थी की योग्यता का आकलन कैसे किया जा सकता है। सवाल यह भी था कि चयन के बाद अभ्यर्थी को बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर जो विषय पढ़ाना है, उस विषय में अभ्यर्थी की विशेषज्ञता का पैमाना किस आधार पर तय होगा।
इसी के मद्देनजनर आयोग ने शासन को प्रस्ताव भेजा था कि स्क्रीनिंग परीक्षा के 75 फीसदी अंक और इंटरव्यू के 25 फीसदी अंक जोड़कर मेरिट तैयार की जाए लेकिन स्क्रीनिंग परीक्षा व इंटरव्यू के अंक जोड़कर चयन किए जाने से संबंधित नियमावली में गुप-ए (समूह-क) के पद शामिल नहीं हैं और असिस्टेंट प्रोफेसर का पद ग्रुप-ए का है।
इसके बाद आयोग ने दूसरा प्रस्ताव भेजा, जिसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से कराई जाए। आयोग के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है और जल्द ही शासन स्तर से दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर देगा।