एक याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उच्चतर न्यायिक सेवा (एचजेएस) भर्ती में न्यायिक अधिकारियों को न्यायिक अनुभव और वकालत के अनुभव के आधार पर आवेदन करने का अधिकार नहीं है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सात साल वकालत अनुभव के आधार पर एचजेएस सीधी भर्ती में शामिल होने का अधिकार नहीं मिल सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा के शशांक सिंह व चार अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा उप्र उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली 1975 के अनुसार एचजेएस भर्ती दो तरह (प्रोन्नति व सीधी) से की जाती है। सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रोन्नति और सात साल की वकालत व 35 से 45 वर्ष आयु के वकीलों से सीधी भर्ती की जाती है। यह नियमावली संविधान के अनुच्छेद 233 सहित अनुच्छेद 309 में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए बनाई गई है।